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HC का निर्देश, TGT नियुक्ति में खामियों की जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाए और 2034 रिक्त पदों को शीघ्र भरें

झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को TGT (Trained Graduate Teacher) नियुक्ति मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने मीना कुमारी व अन्य बनाम राज्य सरकार [W.P.(S) No. 582/2023] मामले में सुनवाई करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में कई खामियों की ओर इशारा किया है.
 

Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को TGT (Trained Graduate Teacher) नियुक्ति मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने मीना कुमारी व अन्य बनाम राज्य सरकार [W.P.(S) No. 582/2023] मामले में सुनवाई करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में कई खामियों की ओर इशारा किया है.

 

वहीं अदालत ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पूरे मामले की जांच के लिए वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का आदेश दिया है. साथ ही, अदालत ने झारखंड सरकार और जेएसएससी को शेष 2034 रिक्त पदों को शीघ्र भरने का निर्देश दिया है.

 

वैन मैन कमेटी झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश डॉ. जस्टिस एस. एन. पाठक की अध्यक्षता में बनेगी. अदालत ने स्पष्ट किया है कि कमेटी को संदर्भ बिंदुओं के आधार पर पूरी प्रक्रिया की गहन जांच करनी होगी.

 

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, इंद्रजीत सिन्हा एवं अपराजिता भारद्वाज ने अपनी दलीलें पेश की. उन्होंने अदालत को बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं और पारदर्शिता की कमी रही है.

 

इस आदेश को TGT अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी राहत और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.

 

जानें वरीय अधिवक्ता ने क्या कहा

प्रार्थियों की ओर से उपस्थिति वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि SC के आदेश के बावजूद रिवाइज मेरिट लिस्ट जारी नहीं की गई और न ही कोर्ट के सामने कोई लिस्ट पेश की गई.

 

13700 केंडिडेट की लिस्ट कोर्ट के सामने पेश की गई, जिसमें कई खामियां हैं. JSSC का शपथपत्र राज्य सरकार के संकल्प से विरोधाभासी है और यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार द्वारा जारी संकल्प के अनुसार 8172 नियुक्तियां 2024 तक हुई थी तो किस परिस्थिति में 8820 नियुक्ति 2022 में हुईं यह बताया गया.

 

सरकार और JSSC द्वारा दी गई अभ्यर्थियों की सूची में लगभग 1000 नाम ऐसे हैं, जिन्होंने सर्विस नहीं ली. ऐसे में संभावना है कि उन पदों पर अयोग्य लोगों को नियुक्ति कर दिया गया. कोर्ट यह मानती है कि पूरे मामले में गंभीर अनियमितता बरती गई है. वैसे अभ्यर्थियों को जिनकी नियुक्ति सही नहीं है, उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. 

 

 

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