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कोचिंग सेंटर सील करने पर HC नाराज, कहा- सीधे शो-कॉज पर कार्रवाई उचित नहीं

Ranchi News: नोटिस में कोचिंग संस्थान में 5 कमियां बतायी गयी और सात दिनों के भीतर उन्हें दूर करने को कहा गया. ऐसा नहीं करने पर परिसर को सील करने की चेतावनी दी गयी थी.
 
सांकेतिक तस्वीर

Ranchi News: झारखंड हाइकोर्ट ने रांची के लालपुर स्थित प्रनामी हाइट्स में संचालित फिजिक्स वाला कोचिंग संस्थान के परिसर को बिना जवाब पर निर्णय लिए सील करने की नगर निगम की कार्रवाई को अनुचित बताया है.

 

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने कहा कि शो-कॉज नोटिस के जवाब पर सक्षम प्राधिकारी को कारणयुक्त आदेश पारित करना चाहिए था. इसके बजाय सीधे परिसर सील करना उचित प्रक्रिया नहीं है.

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अदालत ने अब परिसर के मालिक अभिषेक नरसरिया को एक और अवसर देते हुए दो सप्ताह के भीतर रांची नगर निगम के प्रशासक के समक्ष विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

 

जवाब मिलने के बाद प्रशासक को याचिकाकर्ता अथवा उसके प्रतिनिधि को सुनवाई का अवसर देकर परिसर के संबंध में जांच करनी होगी और इसके बाद तीन सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार सूचित निर्णय लेना होगा.

 

मामले में याचिकाकर्ता ने रांची नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त की ओर से एक जुलाई 2026 को जारी नोटिस को चुनौती दी थी. नोटिस में कोचिंग संस्थान में पांच कमियां बतायी गयी थी और सात दिनों के भीतर उन्हें दूर करने को कहा गया था. ऐसा नहीं करने पर झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 और झारखंड बिल्डिंग बायलॉज, 2016 के तहत परिसर को सील करने की चेतावनी दी गयी थी. इसके बाद छह जुलाई को भी दूसरा नोटिस जारी किया गया.

 

याचिकाकर्ता के अनुसार, उसने दोनों नोटिस के जवाब आठ और नौ जुलाई को दे दिये थे. इसके बावजूद रांची नगर निगम ने जवाब पर कोई आदेश पारित नहीं किया और तीन सितंबर को परिसर को सील कर दिया.

 

नगर निगम की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता के जवाब संतोषजनक नहीं थे और नोटिस में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि कमियां दूर नहीं करने पर परिसर सील किया जा सकता है.

 

कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि जब नगर निगम ने नोटिस जारी किया और उसके जवाब भी प्राप्त हुए, तो सक्षम प्राधिकारी को जवाब पर विचार कर उचित आदेश पारित करना चाहिए था. 

 

प्रशासनिक निष्पक्षता का सिद्धांत सार्वजनिक प्राधिकरण से उचित और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करने की अपेक्षा करता है. यदि किसी व्यक्ति का जवाब स्वीकार नहीं किया जाता है, तो उसके कारण भी आदेश में दर्ज किये जाने चाहिए.

 

अदालत ने कहा कि बिना कोई आदेश पारित किये सीधे परिसर को सील कर देने की प्रक्रिया अत्यंत अनुचित थी. इसी टिप्पणी और निर्देश के साथ अदालत ने याचिका का निष्पादित कर दिया.

 

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