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HC ने निचली अदालत का फांसी का फैसला पलटा, हत्या के दो सजायाफ्ता बरी

  • कोडरमा में चार लोगों की हत्या का है आरोप

Ranchi : वर्ष 2004 में कोडरमा जिलांतर्गत सतगांवा के डुमरी में सेवानिवृत्त शिक्षक कपिलदेव प्रसाद यादव सहित चार लोगों की हत्या मामले में सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट का फैसला आया है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय एवं न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने दोनों सजायाफ्ता संजय यादव एवं रामवृक्ष यादव की निचली अदालत के फांसी की सजा के खिलाफ अपील मंजूर कर ली. अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता नवीन कुमार जायसवाल एवं अधिवक्ता नूतन शर्मा ने पक्ष रखा था.

 

खंडपीठ ने कहा कि गवाहों का बयान एक दूसरे से मेल नहीं खाता है जो संदेह पैदा करता है. गवाहों का बयान विश्वास करने लायक नहीं है. कोडरमा की अदालत ने इन दोनों को मामले में फांसी की सजा सुनाई थी.

 

दरअसल, मामले में फांसी की सजा पाए दो सजायाफ्ता संजय यादव एवं रामवृक्ष यादव कुमार की सजा के खिलाफ अपील और राज्य सरकार द्वारा फांसी की सजा को कंफर्म करने को लेकर याचिका दाखिल की गई थी.  

 

सितंबर 2004 का है मामला 

25 सितंबर 2004 को शाम करीब 7:30 बजे जब शिक्षक कपिलदेव प्रसाद यादव अपने घर की छत पर बैठ कर समाचार सुन रहे थे, उसी समय 20-25 की संख्या में अपराधियों ने उनके घर पर हमला कर दिया था. हमले में कपिलदेव प्रसाद यादव, उनके पुत्र नीरज यादव, पौत्र अनोज कुमार व रिश्तेदार सकलदेव कुमार की हत्या कर दी गई. उनके सिर को धड़ से अलग कर दिया गया था. घटना के वक्त शिक्षक के पुत्र सुरेश कुमार ने किसी तरह छत से कूद कर अपनी जान बचाई थी. 

 

हत्या के बाद एमसीसी जिंदाबाद का नारा लगाते निकले थे दोषी. 

मामले में सुरेश कुमार के लिखित आवेदन पर सतगावां थाना में एफआईआर दर्ज किया गया था. घटना को अंजाम देने के बाद सभी अभियुक्त एमसीसी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए निकल गए थे. मामले में 16 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. सरकार के निर्देश पर मामले की हुई सीआईडी जांच में आठ लोगों को बरी कर दिया गया था. वहीं 8 लोगों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया था.

 

इस मामले के मुख्य अभियुक्त सुनील यादव एमसीसीआई एरिया कमांडर को पूर्व में कोडरमा न्यायालय से आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है. वर्तमान में वह जमानत पर है. वहीं मामले के एक अभियुक्त दारोगी प्रसाद यादव की मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है. जबकि रंजीत यादव, विपिन यादव, नवलेश यादव व राजेश प्रसाद यादव फरार चल रहे हैं.

 

अभियुक्त रामवृक्ष यादव व संजय यादव के खिलाफ 13 दिसंबर 2016 को न्यायालय में आरोप पत्र गठित किया गया था. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक विनोद प्रसाद ने 11 गवाहों का परीक्षण कराया था. इस घटना में मनोज यादव, महेश कुमार, सरस्वती देवी, दयानंद प्रसाद यादव व सुरेश कुमार घटना के प्रत्यक्षदर्शी गवाह थे. गवाहों के बयान व अभिलेख पर उपस्थित साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने मामले को जघन्य हत्या की श्रेणी में मानते हुए फांसी की सजा सुनायी.

 

 

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