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नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पर HC ने कहा - इसे आर्थिक रूप से और मजबूत बनाएं

Ranchi: कांके स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के संचालन के लिए सरकार से मांगे गए वार्षिक अनुदान पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने मौखिक कहा कि नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में झारखंड के विद्यार्थियों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है. यहां के मेधावी छात्रों को यूनिवर्सिटी का लाभ मिल रहा है. ऐसे में यूनिवर्सिटी को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाया जाना चाहिए. 


कोर्ट ने मामले की सुनवाई 9 जुलाई को कॉन्फ्रेंस हॉल में निर्धारित करते हुए उस दिन अधिवक्ता के अलावा, कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी उपस्थित रहने को कहा है. साथ ही महाधिवक्ता राजीव रंजन से भी कहा है कि अगर आवश्यकता समझते हैं तो सरकार के संबंध सचिवों को भी इस सुनवाई में शामिल करें. 

 

इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया अगर आवश्यकता हो तो नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी  के फंड के लिए CCL , SAIL  आदि कंपनियों से आग्रह कर सीएसआर फंड के माध्यम से उनसे मदद ली जा सकती है. जिसपर कोर्ट ने CCL , SAIL  के अधिवक्ता से इस संबंध में जवाब तलब किया. हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की. 

 

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि लॉ यूनिवर्सिटी स्वपोषित विश्वविद्यालय है, विश्वविद्यालय को जमीन के अलावा शुरू में ही अनुदान के रूप में एक बड़ी राशि दे दिया गया था. नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को वार्षिक फंड देने का कोई प्रावधान नहीं है. 

 

सरकार की ओर से अधिवक्ता शहबाज अख्तर ने पैरवी की. दरअसल  मामले में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने राज्य सरकार से इस विश्वविद्यालय के लिए वार्षिक अनुदान देने की मांग की है. विश्वविद्यालय का कहना है कि बिना फंड के विश्वविद्यालय का संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है.  


इस संबंध में बार एसोसिएशन हाईकोर्ट ने जनहित याचिका दायर की है. नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी कांके में आधारभूत सुविधा के मामले में दायर जनहित याचिका पर आज सुनवाई हुई. प्रार्थी बार एसोसिएशन झारखंड हाइकोर्ट की ओर से जनहित याचिका दायर की गयी है.

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