Ranchi: झारखंड में खनन कानूनों के तहत प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग से संबंधित अशोक सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि नीलामी की गई गाड़ी वापस ले ली गई है, याचिकाकर्ता को उसकी गाड़ी वापस लेने के लिए नोटिस किया गया, लेकिन वह अभी तक नहीं आए.
कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया. राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद और अधिवक्ता शाहबाज अख्तर ने पक्ष रखा. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई हुई.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार को एक माह का समय प्रदान करते हुए मुख्य सचिव को भी इस मामले को देखने को कहा था. इस मामले में पूर्व में लातेहार के तत्कालीन उपायुक्त भोर सिंह यादव वर्चुअल रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए थे. कोर्ट ने उनसे मौखिक कहा था कि आपके कारण जो समस्या पैदा हुई है, उसका निदान क्यों अब तक नहीं निकला?
अवैध खनन के परिवहन में पकड़े गए वाहन की जब्ती के बाद जल्दीबाजी में उसकी नीलामी कर उसे तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दिया गया. जबकि इससे संबंधित मामले में रिवीजन याचिका लंबित है. प्रार्थी को उस मौका दिए बिना उनके वाहन की नीलामी का बेचने में जल्द क्यों कर दी गई? सुनवाई के दौरान लातेहार के उपायुक्त संदीप कुमार कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए थे.
बता दें कि प्रार्थी की हाईवा गया जिला से चोरी हो गया है, जहां उन्होंने इसे लेकर प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी. बाद में यह हाईवा अवैध माइनिंग के परिवहन के दौरान बालूमाथ में पकड़ा गया था. लातेहार के तत्कालीन डीसी भोर सिंह यादव ने उस पकड़े गए हाईवा की जब्ती कर जल्दीबाजी में नीलामी की प्रक्रिया शुरू की और उसे किसी तीसरे पक्ष को वाहन को काफी सस्ते मूल्य पर बेच दिया है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment