Patna News: बिहार के सरकारी अस्पतालो में 307 करोड़ की माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल खरीद मामले की सुनवाई पटना हाईकोर्ट में हुई. कोर्ट ने राज्य सरकार से 19 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
मुख्य न्यायाधीश वी कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई की. याचिकाकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता संजीव कुमार मिश्र ने कोर्ट के समक्ष खरीद प्रक्रिया से जुडे आरोप रखे.
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याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में 8 सितंबर को भी सुनवाई हुई थी. उस समय भी अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. अब कोर्ट ने सरकार को 19 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है.
बिहार के सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निबटारे के लिए खरीदे गए माइक्रोवेव डस्टबीन और बायाडिग्रेडेबल बैग की खऱीद से जुड़े मामले में राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
आरोप है कि बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सरकारी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के निबटारे के लिए 75 और 45 लीटर क्षमत वाले माइक्रोवेव डस्टबीन और बायोडिग्रेडेबल बैग की आपूर्ति के लिए निविदा निकाली थी. यह निविदा लखनऊ की एसएस मेडिकल सिस्टम को दिये जाने का दावा किया गया है.
75 लीटर के एक माइक्रोवेव डस्टबीन की खरीद कीमत 15490 रुपये होने का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता के अनुसार इसकी बाजार कीमत करीब 1550 रुपये बतायी गई है. यानी दोनों कीमतों के बीच बड़ा अंतर होने का दवा किया गया है.
याचिका में 45 लीटर क्षमता वाले माइक्रोवेव डस्टबीन की खरीद 11474 रुपये में किये जाने का आरोप है. वहीं इसकी बाजार कीमत करीब 1162 रुपये बताई गई है. इन कीमतों के आधार पर खऱीद प्रक्रिया पर सवाल उठाये गए हैं.
याचिका में 75 लीटर के बायोडिग्रडेबल बैग की कीमत 98 रुपये और 45 लीटर के बैग की कीमत 69 रुपये होने का दावा किया गया है. इसके मुकाबले इनकी कीमत क्रमश: 8.5 रुपये और 5.75 रुपये बताई गी है.
कोर्ट को बताया गया कि जून 2024 से 18 अप्रैल 2026 के बीच इन वस्तुओं की आपूर् के लिए 57 ऑर्डर दिये गए. इस निविदा प्रक्रिया में 7 कंपनियों ने हिस्सा लिया था.
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि चारों वस्तुओं की खरीद जीएसटी सहित करीब 307 करोड़ रुपये में की गई. याचिकाकर्ता के मुताबिक चार अन्य आपूर्तिकर्ता फर्मों से कोटेशन लेने पर इन्हीं चार वस्तुओं की कुल कीमत करीब 29 करोड़ रुपये आती है. इस आधार पर खरीद प्रक्रिया में कीमतों के अंतर को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया.
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