New Delhi : सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी हो गयी. कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. हालांकि कोर्ट ने नसीहत दी कि चुनाव आयोग सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया में नियमों का सही ढंग से पालन करे
याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील देते हुए आरोप लगाया कि जो नयी मतदाता सूची बनायी जा रही है, उसमें महिलाओं के नाम काटे जा रहे हैं. कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है.
प्रशांत भूषण ने कहा कि गरीब और कमजोर वर्ग के वोटरों को खुद फॉर्म भरने की जिम्मेदारी दे दी गयी है. वे फॅार्म नहीं भर पा रहे है. प्रवासी मजदूर जो कुछ समय के लिए काम के लिए जाते हैं और वापस आते हैं, वे लोग भी फॉर्म नहीं भर पाते,
प्रशांत भूषण ने कहा कि चुनाव आयोग मनमानी नहीं कर सकता. नागरिकता को लेकर कहा कि चुनाव अधिकारी यह कैसे तय कर सकता है कि कोई देश नागरिक है या नहीं? आयोग कोई अदालत नहीं है. अगर विवाद हो तो हमें जिरह का मौका तो मिलना चाहिए.
प्रशांत भूषण ने कहा कि ECI कहता है कि उसे संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत किसी भी तरह से काम करने की पूरी छूट है. आयोग कहता है कि वह संसद द्वारा बनाये गये किसी भी कानून से बंधा नहीं हैं. किसी भी नियम या अपने खुद के मैनुअल से बंधा नहीं हैं. इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता. कहा कि कोई भी अथॉरिटी मनमाने ढंग से काम नहीं कर सकती.
प्रशांत भूषण ने कहा कि ERO (चुनाव अधिकारी) नागरिकता कैसे तय कर सकता है. जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट को छोड़कर अन्य दस्तावेज नागरिकता का कोई सबूत नहीं हैं.अगर किसी के पास जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट नहीं है तो ERO इसे कैसे तय करेगा. प्रशांत भूषण ने कहा कि वोट देने का संवैधानिक अधिकार मनमाने ढंग से नहीं छीना जा सकता. यह एक ट्रिब्यूनल का काम है.
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