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एक दल के व्यवहार से मन आहत, मजबूर होकर सदन को एक दिन पूर्व किया स्थगित: स्पीकर

Ranchi: झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र को एक दिन पूर्व अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के फैसले पर विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने काफी दुखः व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है सदन में एक दल के व्यवहार से आहत होकर मजबूरी में दुखी मन से मैंने सदन को एक दिन पहले ही स्थगित करने का निर्णय लिया. रविंद्र नाथ महतो ने कहा कि सदन जनमानस का स्वरूप होता है, लेकिन वर्तमान में सदन की जैसी हास्यास्पद स्थिति देश और राज्य के सामने बनती जा रही है, मैं नहीं चाहता कि ऐसी स्थिति बने. सत्र की समाप्ति के बाद गुरुवार को अपने विधानसभा कक्ष में मीडिया को संबोधित करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि सदन के शुरुआत के पहले यह अपेक्षा होती है कि सत्र भले ही छोटा हो परंतु सार्थकपूर्ण हो. आप देख सकते हैं, इन दिनों राज्य में अल्प वर्षा के कारण कृषि की स्थिति क्या है. सुखाड़ होने की प्रबल संभावना बनती जा रही है. इसके अलावा कई जनमानस के मुद्दे थे जिसे सत्र में लाया जाना था, लेकिन विपक्ष के व्यवहार के कारण इन मुद्दों पर कोई बात नहीं बन पायी. इसे पढ़ें-कॉमनवेल्थ">https://lagatar.in/commonwealth-games-boxer-lovlina-forced-to-return-empty-handed-amid-controversies/">कॉमनवेल्थ

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उन्होंने कहा, सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष के सदस्यों का जैसा व्यवहार था, उसे देखकर मैंने चार सदस्यों को निलंबित किया. बाद में मैंने ही समय पूर्व (जिस अवधि तक निलंबन किया था, यानी 4 अगस्त) उनका निलंबन वापस इस उम्मीद से लिया कि वे सदन की गरिमा को बनाए रखेंगे. साथ ही सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करेंगे. लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला. इस सत्र में पहली बार नवनिर्वाचित विधायक शिल्पी नया तिर्की ने भी अपने पहले भाषण में जो बातें की,  उसका भी विपक्ष के सदस्यों ने ज्यादा सम्मान नहीं किया. उससे मेरा मन काफी आहत हुआ. इसे भी पढ़ें-झारखंड">https://lagatar.in/jharkhand-assembly-adjourned-indefinitely-speaker-said-this-decision-was-taken-to-save-the-dignity-of-the-house/">झारखंड

विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित,स्पीकर ने कहा- सदन की गरिमा बचाने के लिए लिया यह फैसला
भविष्य में ऐसा ना हो, इसे लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैं सभी दल के नेताओं से इस बारे में बात करूंगा. उनसे आग्रह करूंगा कि सत्र की बर्बादी से जनता की जो आकांक्षाओं की अनदेखी होती है उस पर विराम लगाया जाये. [wpse_comments_template]  

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