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राज्यपाल और भाजपा से नहीं, अपने कारणों से होगी हेमंत सरकार की दुर्दशा : सरयू राय

-भाजपा से बैर नहीं, अपमान का प्रतिकार करने के लिए रघुवर के खिलाफ लड़ा था चुनाव -पैर छूना और पैर खींचना बन्ना गुप्ता की फितरत में शामिल -संस्कृति को नष्ट होने से बचाने के लिए किया प्रयास सांप्रदायिकता नहीं -होटवार जेल के बैरक नंबर 11 का भूगोल बदलवा दे ईडी Ranchi: वरिष्ठ विधायक सरयू राय लगातार न्यूज नेटवर्क के कार्यक्रम में राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक बोले. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ किस परिस्थिति में उन्हें लड़ना पड़ा. हेमंत सरकार के मंत्री बन्ना गुप्ता की फितरत क्या है. झामुमो को राज्यपाल की गरिमा क्यों नहीं गिरानी चाहिए और किन कारणों से हेमंत सरकार की दुर्दशा हो सकती है. इन सब मुद्दों पर उन्होंने खुलकर अपनी बातें रखीं. देखें वीडियो- https://www.youtube.com/watch?v=JbChYTbhT0A

संवैधानिक संस्थाओं को लेकर संयमित बयान हो- सरयू राय

सीएम के ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले पर उन्होंने झामुमो को सलाह दी और कहा कि मामले में दो संवैधानिक संस्थाएं शामिल हैं. संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ संयमित तरीके से बोलना चाहिए. अगर लिफाफा नहीं खुल रहा है तो राज्य का क्या नुकसान हो रहा है. हेमंत सोरेन ने जो किया है वो उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है. अगर चुनाव आयोग ने अयोग्य ठहरा ही दिया तो बहुमत है, हेमंत सरकार चला सकते हैं. इसे भी पढ़ें –OBC">https://lagatar.in/elections-in-all-49-municipalities-will-be-held-in-2023-without-obc-reservation/">OBC

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आत्मविश्वास के साथ सरकार चलाएं हेमंत- सरयू राय

एक सवाल के जवाब पर सरयू ने कहा कि हेमंत को आत्मविश्वास के साथ सरकार चलाना चाहिए. राजभवन का लिफाफा खुले या न खुले इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए. राज्यपाल के लिए समय सीमा निर्धारित नहीं है. उनके विवेक पर है कि वे लिफाफा खोलें या न खोलें. झामुमो की तरफ से इसपर आरटीआई डालने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई. कहा कि इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. आरटीआई राजभवन में डालने पर जवाब नहीं मिला तो आखिर फर्स्ट और सेकंड अपील कहां की जाएगी. राज्यपाल लिफाफा नहीं देना चाहेंगे तो झामुमो कैसे ले लेगा. इसलिए राज्यपाल की गरिमा घटाने से परहेज करना चाहिए.

शाह, राजनाथ और नड्डा से कह दिया था रघुवर के खिलाफ चुनाव लड़ूंगा- सरयू राय

सरयू राय ने कहा कि वे भाजपा से दूर नहीं जाना चाहते थे, लेकिन एक परिस्थिति आई कि दूर जाना पड़ा. राज्य में भाजपा की सरकार में रघुवर दास मुख्यमंत्री थे और वे मंत्री थे. दोनों में कई चीजों को लेकर मतभेद था. इन्हीं मतभेदों के कारण रघुवर दास उन्हें अपने मंत्रिमंडल में नहीं रखना चाहते थे. 2019 के चुनाव से पहले टिकट बंटवारे के समय उन्हें पता चला कि रघुवर दास ने गांठ बांध लिया है कि उन्हें टिकट नहीं मिलने देंगे. तब उन्होंने राजनाथ सिंह और अमित शाह समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की. सबसे कहा कि टिकट नहीं देना है तो बता दें ताकि वे यह घोषणा कर सकें कि चुनाव नहीं लड़ेंगे. सबसे यही जवाब मिला कि आपके टिकट को लेकर सोच-विचार किया जा रहा है. चौथी लिस्ट निकलने के बाद उन्होंने जेपी नड्डा से कह दिया कि अब आपलोग मुझे अपमानित कर रहे हैं. अगर आप टिकट नहीं देंगे तो पार्टी से चुनाव नहीं लडूंगा, लेकिन जिस व्यक्ति ने यह परिस्थिति आने पर विवश कर किया है मैं उन्हीं के क्षेत्र में उसके विरोध में चुनाव लड़ूंगा. और आखिर में यही हुआ. इसे भी पढ़ें –जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-tata-steel-foundation-provided-medical-equipment-worth-three-crores-to-the-district-administration/">जमशेदपुर

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‘रघुवर ने कहा था लड़ने दीजिए सरयू को 5000 वोट मिलेंगे’

उन्होंने कहा कि भाजपा की पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में राजनाथ सिंह ने कहा था कि अगर सरयू राय को टिकट नहीं दिया गया तो वे रघुवर दास के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे. बैठक में रघुवर भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि लड़ने दीजिए उन्हें 5000 वोट मिलेंगे. सरयू ने कहा कि रघुवर के खिलाफ उन्होंने चुनाव इसलिए नहीं लड़ा कि वे जीत जाएंगे. मैं अपने स्वाभिमान को बचाने के लिए चुनाव लड़ा था. सिंहभूम के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को भी उनकी ही तरह रघुवर ने अपमानित किया था. सभी की भावनाएं उनके साथ जुड़ी थीं. हिम्मत करके उस सीट से चुनाव लड़े जहां 2014 के विधानसभा चुनाव में रघुवर दास 60 हजार वोट से जीते थे और भाजपा के सांसद विद्युत वरण महतो 1 लाख तीन हजार वोट से जीते थे. चुनाव के मैदान में उतरने के बाद भाजपा के 60 फीसदी से ज्यादा कार्यकर्ता उनके साथ आ गये थे. आरएसएस के कार्यकर्ता सपोर्ट कर रहे थे.

पैर छूना और पैर खींचना बन्ना गुप्ता की फितरत में - सरयू

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को लेकर सरयू राय ने कहा कि वे एक विशेष मिट्टी के बने हुए हैं. वे ऐसे शख्स हैं जो समय आने पर बाप को गधा और गधे को बाप कह देंगे. वो जो करते हैं उसको सीमा से अधिक बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. अपने विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने हर गली-नुक्कड़ पर अपना नाम लिखवा दिया है. रघुवर दास ने भी ऐसा ही किया था. इसे लेकर उन्होंने विधानसभा में सवाल उठाया था कि आखिर ये किस निधि से और कैसे होता है. सरयू ने कहा कि शुरू से ही उन्हें बन्ना गुप्ता की कार्यशैली नहीं भाती. पैर भी छूते हैं और फोटोग्राफर से कहते भी हैं कि फोटो खींचो. पैर छूना और पैर खींचना उनकी फितरत में है.

पत्रकार पेंशन योजना पर सीएम से करेंगे बात- सरयू राय

पत्रकार पेंशन योजना के सवाल पर सरयू राय ने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री से क्या कहा जा सकता है. मुख्यमंत्री तो करेंगे वही जो उनके मन में होगा. उनकी प्राथमिकताएं आज कुछ और हैं. वे जल्दी-जल्दी कुछ चीजें कर रहे हैं. कई काम इस मामले में अच्छे हो जा रहे हैं. ऐसा आदमी एक खास मानसिक स्थिति में ही करता है. इसी में अगर पत्रकार पेंशन योजना भी निपट जाए तो अच्छा होगा. वे सोशल मीडिया और अखबार के माध्यम से सीएम का इस दिशा में ध्यान आकृष्ट कराएंगे. इसे भी पढ़ें –गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-bjp-will-launch-agitation-against-hemant-government/">गिरिडीह

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सांप्रदायिकरण से बचना मुश्किल, निकालना होगा निदान- सरयू राय

सरयू राय ने कहा कि सांप्रदायिकरण से बचना मुश्किल है. इसका निदान निकालना होगा. वे इस मामले में तटस्थ नहीं हैं. वे आरएसएस के सेवक रहे हैं. उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति बचाने के लिए किया गया प्रयास सांप्रदायिकता नहीं है. आज जरूरत है कि देश के युवा पीछे मुड़कर देखें कि भारत को भारत की तरह रहना है या नहीं. या फिर भारत को इतिहास के पन्ने में उसी तरह सिमट जाना है जैसे पर्सिया ईरान हो गया. विश्व में कई संस्कृतियां नष्ट हुईं. अगर अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हम खड़े हों और कोई इसे सांप्रदायिक कहे तो परहेज और शर्म नहीं करना चाहिए.

हर सरकार को दो साल देता हूं- सरयू

कभी सरकार और कभी विपक्ष से नजदीकियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे लेकर उनके मन में कोई कन्फ्यूजन नहीं है. जब हेमंत सोरेन की सरकार बनी तो उन्होंने सरकार का समर्थन किया. बाबूलाल मरांडी ने भी समर्थन किया. कहा था कि हमारा समर्थन गुण दोष के आधार पर रहेगा. सरयू ने कहा कि वे नहीं चाहते कि अनावश्यक कोई सरकार अस्थिर की जाए. वे हर सरकार को दो साल का समय जरूर देते हैं. रघुवर सरकार में 2015 से 2017 तक उन्होंने कुछ नहीं बोला. इस सरकार को भी समय दिया. इसे भी पढ़ें –धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-new-rates-of-dairy-milk-applicable-from-october-11-khatal-operator-is-also-trying-to-increase-the-price/">धनबाद

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ईडी होटवार जेल का भूगोल परिवर्तित करवा दे- सरयू राय

होटवार जेल के बैरक नंबर 11 के सवाल पर उन्होंने कहा कि बैरक 11 में एक नए मेहमान गये हैं. बैरक को सजाया-संवारा गया है. वहां कमोड लगाया गया है. हालांकि 13-14 दिन वे कमोड का इस्तेमाल नहीं करेंगे. कहा कि ईडी से अपेक्षा है कि बैरक नंबर 11 के भूगोल में परिवर्तन करा दे. जो यहां हैं उन्हें दूसरे जेल में शिफ्ट कर दें और जो रिम्स में इलाज के लिए भर्ती हैं उन्हें और अच्छी चिकित्सा के लिए एम्स भेज दें. होटवार जेल के मामले को उन्होंने सोमवार की सुबह उठाया था. ट्वीट कर कहा था कि जेल के सभी वार्डों में क्षमता से दोगुना कैदी रह रहे हैं, लेकिन वार्ड नंबर 11ए में केवल 5 कैदी हैं. इन्हें ईडी ने जेल भेजा है या ऐशगाह. क्या 11ए वीवीआईपी वार्ड घोषित है. [wpse_comments_template]

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