Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने कशिश डेवलपर्स द्वारा मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (MCA) द्वारा शुरू करायी जांच को निरस्त करने की मांग खारिज कर दी है. कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट दवारा आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने के बावजूद MCA द्वारा जांच कराये जाने को चुनौती दी थी.
हाईकोर्ट ने न्यायाधीश रंगन मुखोपाध्याय ने मामले की सुनवाई के बाद यह कशिश डेवलपर्स की याचिका खारिज कर दी. न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी ने DHFL से कर्ज स्वीकृत कराने में गलत ब्योरे का इस्तेमाल किया था. यह मामला फंड को इधर-उधर करने से संबंधित है. इसलिए याचिका खारिज की जाती है.
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उल्लेखनीय है कि कशिश डवलपर्स ने 2013 में गुड़गांव में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किया था. 2015 तक प्रोजेक्ट प्रगति पर थी. लेकिन फंड की कमी की वजह से कंपनी से DHFL ने 2018 में प्रोजेक्ट के रिवाइवल के लिए 725 करोड़ रुपये का कर्ज स्वीकृत कराया था. लेकिन इसमें से 503 करोड़ ही DHFL ने दिया. इसके बाद वह दिवालिया हो गया.
उसके बाद घर के दो खरीदारों ने कंपनी से पैसा लौटाने की मांग की और आर्थिक अपराध शाखा से शिकायत की. गुड़गांव आर्थिक अपराध शाखा ने जांच के बाद शिकायतों को तथ्यहीन बताया. इसके बाद इन दोनों ने दिल्ली आर्थिक अपराध शाखा में प्राथमिकी दर्ज करायी. हाईकोर्ट ने इस प्राथमिकी को निरस्त कर दिया. इसके बावजूद MCA ने कशिश डेवलपर्स के खिलाफ गंभीर अपराध में जांच शुरू करायी. कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस जांच को रोकने की मांग की थी.
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