- कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश को रखा बरकरार
Ranchi : रांची नगर निगम में असिस्टेंट लॉ ऑफिसर पद पर पदोन्नति देने के आग्रह से संबंधित अपील (L.P.A.) पर झारखंड हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने अपीलकर्ता अरुण कुमार की अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा है.
इसे भी पढ़ें...
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता असिस्टेंट लॉ ऑफिसर पद के पद पर पदोन्नति का दावा नहीं कर सकते. केवल लीगल सेक्शन में कार्य करने से कोई व्यक्ति लीगल कैडर का सदस्य नहीं बन जाता. लीगल असिस्टेंट के पद पर नियमों के अनुसार नियुक्ति/समावेशन आवश्यक है. असिस्टेंट लॉ ऑफिसर केवल लीगल असिस्टेंट का प्रमोशनल पोस्ट है.
अपीलकर्ता मूलतः सामान्य प्रशासनिक (Assistant) कैडर में नियुक्त थे, उन्हें सीधे असिस्टेंट लॉ ऑफिसर बनाना नियमों के विरुद्ध है. यदि अपीलकर्ता को लीगल असिस्टेंट मान लिया जाए तो उन अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होंगे जिनके लिए नियमों में लीगल असिस्टेंट का पद प्रत्यक्ष भर्ती से भरा जाना है.
अपीलकर्ता का तर्क था कि वह वर्षों से लीगल सेक्शन में कार्य कर रहे थे. रांची नगर निगम ने कई पत्रों में उन्हें लीगल असिस्टेंट बताते हुए उनकी पदोन्नति का प्रस्ताव भेजा. उन्हें लीगल असिस्टेंट माना जाए और असिस्टेंट लॉ ऑफिसर पर पदोन्नत किया जाए. रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता वंदना सिंह ने पक्ष रखा.
दरअसल, अपीलकर्ता अरुण कुमार की नियुक्ति 1996 में अनुकंपा के आधार पर क्लास-III पद पर हुई थी, उन्हें लीगल सेक्शन में सहायक (Assistant) के रूप में पदस्थापित किया गया था. वर्ष 2017 के संशोधित नियमों से पहली बार लीगल कैडर बनाया गया, जिसमें लीगल असिस्टेंट को प्रवेश पद, प्रथम प्रोन्नति पद असिस्टेंट लॉ ऑफिसर और द्वितीय प्रोन्नति पद लॉ ऑफिसर रखा गया था.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.



Leave a Comment