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HC का निर्देश, 12 सप्ताह के भीतर 7वीं JPSC परीक्षा के दिव्यांग अभ्यर्थी की नियुक्ति की करे अनुशंसा

7वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2021) में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित 7 क्षैतिज  पदों को सही ढंग से न भरने को चुनौती देने वाली सदानंद कुमार एवं अन्य दो अभ्यार्थियों की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है.
 
हाईकोर्ट

Ranchi :   7वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2021) में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित 7 क्षैतिज  पदों को सही ढंग से न भरने को चुनौती देने वाली सदानंद कुमार एवं अन्य दो अभ्यार्थियों की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है.

 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने JPSC को 12 सप्ताह के भीतर सदानंद कुमार की नियुक्ति के लिए आवश्यक अनुशंसा करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने इस रिट याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है.  याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा.

 

दरअसल, उक्त परीक्षा में कुल 252 पदों में से 7 पद दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित थे. लेकिन JPSC ने केवल 4 दिव्यांग अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार (इंटरव्यू) के लिए बुलाया, जिसमें से केवल 3 दिव्यांग अभ्यर्थियों का चयन किया गया था. शेष 4 आरक्षित पद अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से भर दिए गए थे.

 

याचिकाकर्ताओं  की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने कोर्ट को बताया कि  राइट्स टू परसंस डिसेबिलिटी एक्ट 2016 की धारा 33 एवं 36 के अनुसार यदि किसी उप-श्रेणी (Blind, Hearing Impairment, Autism आदि) में उपयुक्त अभ्यर्थी उपलब्ध न हों, तो पदों का इंटरचेंज किया जाना चाहिए. यदि तब भी पद न भरें तो उन्हें अगले भर्ती चक्र के लिए कैरी फॉरवार्ड किया जाना चाहिए.

 

याचिकाकर्ता सदानंद कुमार को 580 अंक प्राप्त हुए थे, जो चयनित एक अन्य दिव्यांग अभ्यर्थी के बराबर थे. कोर्ट ने मामले में ऑब्जर्व किया है कि याचिकाकर्ता सदानंद कुमार ने न्यूनतम आवश्यक मानक प्राप्त किया था. उनके 580 अंक चयनित दिव्यांग अभ्यर्थी के समान थे. 

 

JPSC ने स्वयं स्वीकार किया कि दिव्यांग वर्ग के 4 पद रिक्त रह गए थे. कोर्ट ने माना कि दिव्यांग उप-श्रेणियों के बीच इंटरचेंज  का लाभ देकर उनके मामले पर विचार किया जाना चाहिए. 

 

 

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