- मुआवजे के लिए अलग उपाय अपनाने की छूट
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने आशा देवी द्वारा दायर हैबियस कॉर्पस याचिका निष्पादित कर दी. प्रार्थी ने यह याचिका उनके पति की गुमशुदगी को लेकर दायर की थी, जिसमें अदालत से उन्हें खोजकर पेश करने की मांग की गई थी. राज्य सरकार ने अपने जवाब में बताया था कि प्रार्थी के पति (कॉर्पस) का शव बरामद हो चुका है.
इसलिए अब हैबियस कॉर्पस का कोई औचित्य नहीं रह जाता. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने की. खंडपीठ ने माना कि जब कॉर्पस का शव बरामद हो चुका है, तो हैबियस कॉर्पस के तहत कोई और राहत नहीं दी जा सकती.
मुआवजे की मांग को भी इस याचिका में सुनने से इनकार कर दिया गया. हालांकि खंडपीठ ने कहा कि प्रार्थी यदि मुआवजा चाहती हैं, तो इसके लिए कानून के तहत अलग से उचित उपाय अपनाना होगा.
क्या था मामला
याचिकाकर्ता आशा देवी ने अपने पति की गुमशुदगी के बाद हैबियस कॉर्पस रिट दायर की थी. उन्होंने अदालत से पति को खोजकर सुरक्षित प्रस्तुत करने और मामले की निगरानी करने की मांग की थी.
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