Ranchi : झारखंड में संगठित अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें गैंगस्टर प्रिंस खान की भूमिका सबसे अहम बताई जा रही है. पुलिस के सामने आए कबूलनामे और जांच में यह सामने आया है कि प्रिंस खान न सिर्फ गैंग का सरगना है, बल्कि उसने अपराध को संचालित करने के लिए आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया. इस पूरे नेटवर्क के पीछे उसका “गुरु” माने जाने वाले सुजीत सिन्हा का दिमाग काम करता था, जिसने इस गैंग को खड़ा किया और विस्तार दिया.
डिजिटल डॉन: ऐप्स के जरिए चल रहा था अपराध
प्रिंस खान ने पारंपरिक अपराध के तरीकों को छोड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपना हथियार बनाया. Zangi, Telegram, WhatsApp और Messenger जैसे ऐप्स के जरिए वह अपने गुर्गों से संपर्क करता था. इन प्लेटफॉर्म्स का चयन इसलिए किया गया था क्योंकि ये सुरक्षित माने जाते हैं और इन्हें ट्रैक करना अपेक्षाकृत कठिन होता है.
सूत्रों के अनुसार, प्रिंस खान अपने सहयोगियों को ऑडियो, वीडियो और फोटो भेजता था, जिन्हें एडिट कर व्यवसायियों को भेजा जाता था ताकि उनमें डर का माहौल बने. इस डिजिटल प्रोपेगेंडा के जरिए गैंग बिना सामने आए ही अपना दबदबा कायम करता था.
‘गुरु’ सुजीत सिन्हा: पर्दे के पीछे का मास्टरमाइंड
इस पूरे नेटवर्क की जड़ में सुजीत सिन्हा का नाम सामने आया है, जिसे गैंग का “गुरु” माना जाता है. बताया जाता है कि सुजीत सिन्हा ने ही “कोयलांचल शांति सेना” नामक गिरोह की नींव रखी और युवाओं को जोड़कर इसे संगठित रूप दिया.
सिन्हा का काम सिर्फ लोगों को जोड़ना नहीं था, बल्कि पूरे नेटवर्क की रणनीति तैयार करना भी था. किस इलाके में किसे टारगेट करना है, कैसे रंगदारी वसूलनी है, और कब दबाव बनाने के लिए फायरिंग या हमला करना है—इन सबकी योजना उसी के स्तर पर बनती थी. जांच में यह भी सामने आया है कि जेल में रहने के बावजूद उसके परिवार के सदस्य और करीबी लोग गिरोह के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे.
विदेश से कंट्रोल: पाकिस्तान कनेक्शन
कबूलनामे के अनुसार, प्रिंस खान फिलहाल भारत से बाहर, कथित तौर पर पाकिस्तान में छिपा हुआ है और वहीं से पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा है. वह इंटरनेट कॉलिंग और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए अपने गुर्गों को निर्देश देता था.
यह अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रिंस खान ने विदेश में बैठकर किस तरह अपनी जड़ें मजबूत कीं और क्या उसे वहां से किसी तरह का सहयोग मिल रहा है.
गैंग की कार्यप्रणाली: ‘छोटे सरकार टैक्स’ का आतंक
गैंग का मुख्य उद्देश्य व्यवसायियों, ठेकेदारों, डॉक्टरों और जमीन कारोबारियों से रंगदारी वसूलना था. इसे गैंग के अंदर “छोटे सरकार टैक्स” के नाम से जाना जाता था. प्रिंस खान के निर्देश पर गिरोह के सदस्य टारगेट तय करते थे और फिर उन्हें कॉल, मैसेज या वीडियो के जरिए धमकी दी जाती थी. रकम नहीं देने पर फायरिंग, हमला या हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जाता था.
हाईटेक क्राइम नेटवर्क: हर सदस्य की अलग भूमिका
इस गैंग में काम पूरी तरह संगठित तरीके से बंटा हुआ था इंटेलिजेंस टीम व्यवसायियों और टारगेट की जानकारी जुटाना, कम्युनिकेशन टीम: धमकी भरे कॉल और मैसेज भेजना, शूटर: फायरिंग और हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम देना, लॉजिस्टिक्स: हथियार, वाहन और ठिकाने का इंतजाम, फाइनेंस: रंगदारी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करना. प्रिंस खान इन सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग करता था, जबकि सुजीत सिन्हा रणनीतिक दिशा तय करता था.
हथियार और शूटर: अंतरराज्यीय नेटवर्क
गिरोह के पास अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध थे, जिनमें कुछ प्रतिबंधित पिस्टल भी शामिल थीं. ये हथियार मध्यप्रदेश जैसे राज्यों से मंगवाए जाते थे, जबकि शूटरों की भर्ती धनबाद और आसपास के इलाकों से की जाती थी.
गैंग के सदस्य लगातार लोकेशन बदलते रहते थे और जंगलों या सुनसान इलाकों में छिपकर रहते थे, जिससे पुलिस के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता था.
डर का माहौल बनाने की रणनीति
प्रिंस खान की एक खास रणनीति थी—डर का माहौल बनाना. इसके लिए वह ऑडियो-वीडियो क्लिप्स तैयार करवाता था, जिसमें खुद की आवाज या नाम का इस्तेमाल कर धमकी दी जाती थी. इन क्लिप्स को एडिट कर और ज्यादा खतरनाक बनाया जाता था. इसके अलावा, छोटे-छोटे हमले या फायरिंग करवा कर यह संदेश दिया जाता था कि अगर रंगदारी नहीं दी गई तो अंजाम गंभीर होगा.
पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
इस पूरे मामले ने पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. एक ओर जहां गैंग का सरगना देश के बाहर है, वहीं दूसरी ओर उसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है.
हालांकि, हालिया कबूलनामे के बाद पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं और लगातार छापेमारी की जा रही है. कई संदिग्धों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही बड़े स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है.
प्रिंस खान और उसके “गुरु” सुजीत सिन्हा का यह नेटवर्क यह दिखाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अपराध को नए स्तर पर पहुंचाया जा सकता है. सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए चल रहा यह गैंग पारंपरिक पुलिसिंग के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है.
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