Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में रिक्त पदों को भरने को लेकर सख्त रवैया अपनाया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने आदेश का अनुपालन नहीं होने पर जेएसएससी सचिव एवं गृह सचिव को किया शोकॉज नोटिस जारी किया है. उनसे एक सप्ताह में जवाब मांगा है, पूछा है क्यों नहीं आदेश का अनुपालन होने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए.
कोर्ट ने आदेश का अनुपालन को लेकर सरकार द्वारा मांगे गए 6 सप्ताह का समय देने से इनकार करते हुए उनकी हस्तक्षेप याचिका (IA ) खारिज कर दी. कोर्ट ने जेएसएससी के द्वारा समय मांगे जाने के आग्रह को भी नहीं माना. सरकार की ओर से मोहम्मद शहाबुद्दीन एवं जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल एवं प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा.
मामले में जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने कोर्ट को बताया की असिस्टेंट जेलर और जेल वार्डन की नियुक्ति प्रक्रिया में जेएसएससी तभी आगे बढ़ सकता है, जब सरकार की ओर से उसे सफल अभ्यर्थियों का फिजिकल टेस्ट का लिस्ट उपलब्ध कराया जाए. सरकार की ओर से सफल अभ्यर्थियों का अभी तक फिजिकल टेस्ट का लिस्ट नहीं आया है.
कोर्ट ने गृह सचिव एवं जेएसएससी सचिव को जारी शो कॉज नोटिस का जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर निर्धारित की. वहीं आदेश का अनुपालन के लिए सुनवाई की अगली तिथि 15 दिसंबर निर्धारित की है.
इसे भी पढ़ें -
यहां बता दें कि पूर्व की सुनवाई में खंडपीठ ने राज्य सरकार और जेएसएससी को निर्देश दिया था कि झारखंड की जेलों में रिक्त पदों को हर हाल में 6 महीने में भरे. इस संदर्भ में 1 अप्रैल को ही हाईकोर्ट ने सरकार को 6 माह का समय देते हुए जेलों में रिक्त पद भरने को कहा था. इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए.
गुरुवार को राज्य में जेलों की व्यवस्था में सुधार व मॉडल जेल मैनुअल को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई हुई. मामले में राज्य सरकार और जेएसएससी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जेल में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है. इसके तहत जेएसएससी की ओर से असिस्टेंट जेलर, जेल वार्डर, मेडिकल नर्सिंग स्टाफ आदि कई पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया है. जेल में पड़े कुछ अन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अधियाचना मांगी गई है.
सुनवाई के दौरान खंडपीठ को बताया गया था राज्य की जेलों में 81 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं. दरअसल जेल सुधार व मॉडल जेल मैनुअल के मामले में झारखंड हाइकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

