Search

RRDA मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश हाईकोर्ट ने रखा जारी

Ranchi: हाईकोर्ट में रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (आरआरडीए) की ओर से दायर अपील पर सुनवाई हुई. आरआरडीए ने झारखंड पंचायत राज अधिनियम द्वारा शासित क्षेत्रों में भवन निर्माण पर आरआरडीए का नियंत्रण नहीं रखने से संबंधित हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी है.  हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में पारित अंतरिम आदेश जारी रखते हुए अगली सुनवाई तक संबंधित परिसर की स्थिति यथावत रखने का निर्देश दिया है. 


मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी. खंडपीठ ने इसी से संबंधित प्रतिवादी लवलीन कुमार के मामले से संबंधित को भी अन्य सभी केस के साथ संलग्न करने का इसमें भी यथावत स्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया. मामले में आरआरडीए की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा. 


वहीं प्रतिवादी लवलीन कुमार और मीनू त्रिवेदी और अन्य की ओर से अधिवक्ता भास्कर त्रिवेदी ने पक्ष रखा. दरअसल  पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने निर्देश दिया था कहा कि अगली सुनवाई तक परिसर का स्टेटस-क्वो बरकरार रहेगा. साथ ही प्रतिवादी–कैविएटर को निर्देश दिया था कि वह परिसर का डी-सीलिंग (सील हटाने) पर जोर नहीं देंगे. 

 

बता दें कि हाईकोर्ट की एकल पीठ में आदेश दिया था कि आरआरडीए को झारखंड पंचायत राज अधिनियम द्वारा शासित क्षेत्रों में भवन निर्माण पर नियंत्रण रखने का अधिकार नहीं है. साथ ही याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों के विरुद्ध जारी विध्वंस और सीलिंग आदेशों को रद्द कर दिया था. जिसे आरआरडीए ने अपील दायर कर चुनौती दी है. 


एकल पीठ ने पाया था कि दोनों अधिनियम सीधे तौर पर परस्पर विरोधी हैं और निष्कर्ष निकाला कि जहां ऐसी असंगति मौजूद है, वहां पंचायत राज व्यवस्था ही प्रभावी होगी, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण अधिनियम के संबंधित प्रावधान उस असंगति की सीमा तक अप्रभावी हो जाएंगे. 


एकल पीठ ने सीलबंद ढांचों को खोलने का निर्देश दिया था और स्पष्ट किया था कि पंचायत-नियंत्रित क्षेत्रों में निर्माण कार्य की निगरानी केवल पंचायत राज अधिनियम और इसके तहत अधिकृत अधिकारियों द्वारा ही की जानी चाहिए.

 

विवादित आदेश से प्राधिकरण की वैधानिक शक्तियां हो रही है प्रभावित 


पिछली सुनवाई में आरआरडीए की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में दलील दी थी कि विवादित आदेश से प्राधिकरण की वैधानिक शक्तियां प्रभावित हो रही हैं और यह आदेश वस्तुतः आरआरडीए को निष्प्रभावी कर देता है.


सुनवाई के दौरान बताया गया था कि संबंधित परिसर को वर्ष 2021 में सील किया गया था. अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने अपीलकर्ताओं को शेष प्रतिवादियों को नोटिस की सेवा करने का निर्देश था.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

 

 

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp