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हजारीबाग में ट्रैफिक अव्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, DC,SP व नगर आयुक्त को अवमानना नोटिस

Ranchi: हाईकोर्ट ने हजारीबाग शहर में बढ़ती ट्रैफिक समस्या और अव्यवस्थाओं को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट ने हजारीबाग डीसी और एसपी और नगर आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किया है. मामले में कोर्ट के 9 जनवरी के आदेश के आलोक में हजारीबाग डीसी और एसपी व नगर आयुक्त की ओर से व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया था. इनकी ओर से अपने कनीय अधिकारियों के माध्यम से मामले में शपथ पत्र दायर किया गया था. 


जिसपर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए हजारीबाग डीसी और एसपी व नगर आयुक्त पर अवमानना नोटिस जारी करते हुए उन्हें 10 मार्च तक व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. 


इससे पहले प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि हजारीबाग डीसी और एसपी एवं हजारीबाग नगर आयुक्त ने हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया है. इसके अलावा इन्होंने कोर्ट द्वारा निर्धारित की गई समय सीमा के भीतर भी शपथ पत्र दाखिल नहीं किया है. 

 

इन्हें हजारीबाग में सड़क पर अतिक्रमण, पार्किंग स्थलों पर कब्जा और सीसीटीवी कैमरों के खराब होने जैसी समस्याओं के निराकरण पर व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने को कहा गया था, लेकिन इन्होंने अपने कनीय अधिकारी के माध्यम से शपथ पत्र दायर कराया है. यह अवमानना का मामला बनता है. मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई. 

 

केवल कागजों पर हो रही है कार्रवाई

 

यहां बता दें कि पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने कहा था कि कोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद जमीन पर वास्तविक सुधार नहीं दिख रहा है. केवल कागजों पर कार्रवाई हो रही है. कोर्ट ने कहा था कि अभी तक आदेशों का पालन गंभीरता से नहीं किया गया है और अधिकारी केवल समय काटने का प्रयास कर रहे हैं. 


खंडपीठ ने पहले दिए गए आदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्किंग स्थलों से अतिक्रमण हटाना, ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराना और खराब पड़े सीसीटीवी कैमरों को चालू करना जरूरी है. कोर्ट ने यह भी नोट किया था कि वर्ष 2017 में लगाए गए लगभग 160 कैमरे एएमसी (Annual Maintenance Contract) नहीं होने के कारण बंद पड़े हैं. 

 

वरिष्ठ अधिकारियों को संयुक्त बैठक कर हल निकालने का आदेश 


कोर्ट ने हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक,उपायुक्त,नगर आयुक्त को 10 दिनों के भीतर संयुक्त बैठक कर स्थिति की समीक्षा करने और विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि अब जिम्मेदारी जूनियर अधिकारियों पर नहीं छोड़ी जाएगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं जवाबदेही लेनी होगी.

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