Ranchi: हाईकोर्ट ने जोन्हा फॉल के निकट कच्ची सड़क मसरीजारा से हेसलाबेड़ा तक पक्की सड़क निर्माण के मामले में कोर्ट के स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने प्रस्तावित सड़क निर्माण को लेकर राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन से जवाब तलब किया. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुझाव दिया कि उक्त सड़क की चौड़ाई कम-से-कम 8 मीटर रखी जाए, ताकि दो वाहन आसानी से एक-दूसरे को पार कर सकें.
खंडपीठ ने यह भी कहा कि संबंधित क्षेत्र में कई पर्यटन स्थल हैं, ऐसे में मात्र 5 मीटर चौड़ी सड़क भविष्य में यातायात जाम की समस्या पैदा कर सकती है. केंद्र सरकार की ओर से एएसजीआई प्रशांत पल्लव और अधिवक्ता शिवानी जालूका ने पक्ष रखा.
मामले में पक्षकारों ने 5 मीटर चौड़ी सड़क का प्रस्ताव रखा था. बताया गया कि रेलवे अधिकारियों ने सिद्धांततः अपनी भूमि पर 5 से 6 मीटर चौड़ी सड़क निर्माण की सहमति दी है.
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि शेष चौड़ाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अपनी भूमि उपलब्ध कराए, ताकि सड़क की कुल चौड़ाई कम-से-कम 8 मीटर हो सके. साथ ही रेलवे सीमा से बाहर पड़ने वाले हिस्सों के लिए भी राज्य सरकार को अपनी भूमि का उपयोग करना होगा.
खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रस्तावित सड़क का विस्तृत लेआउट प्लान दो सप्ताह के भीतर तैयार कर रेलवे अधिकारियों को अनुमोदन के लिए भेजे. वहीं रेलवे प्रशासन को भी निर्देश दिया गया कि लेआउट प्लान प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने पर निर्णय लिया जाए.
इससे पहले खंडपीठ को बताया गया कि कोर्ट के पूर्व निर्देश के अनुपालन में 16 फरवरी 2026 को संयुक्त निरीक्षण किया गया था, जिसके आधार पर तैयार एक प्रारंभिक खाका (रफ स्केच) अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया. अदालत ने उक्त स्केच को कोर्ट के रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च 2026 को होगी.
इससे पहले राज्य सरकार और रेलवे की ओर से बताया गया कि वे आपसी समन्वय से इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हालांकि कुछ तकनीकी बिंदुओं पर अभी और समन्वय की आवश्यकता है.
दरअसल पिछली सुनवाई में रेलवे की ओर से दायर शपथपत्र में बताया गया था कि मसरीजारा से हेसलाबेड़ा तक कच्ची सड़क को पक्की सड़क में बदलने के लिए रेलवे आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने को तैयार है. केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया था कि रेलवे द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी करने से पहले अनगड़ा (रांची) के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के साथ संयुक्त निरीक्षण आवश्यक है.
हालांकि कई बार सूचना और स्मरण पत्र भेजने के बावजूद अब तक संयुक्त निरीक्षण नहीं हो सका है, जिसके कारण NOC जारी नहीं हो पाया. वहीं सरकार की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि संयुक्त निरीक्षण अधिकतम 10 दिनों के भीतर कर लिया जाएगा. जिसके बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए संबंधित बीडीओ और रेलवे अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर संयुक्त निरीक्षण पूरा करने का निर्देश दिया था.
साथ ही रेलवे को भी निर्देशित किया गया था कि निरीक्षण के बाद अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए, ताकि राज्य सरकार मसरीजारा से हेसलाबेड़ा तक पक्की सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर सके.
अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि स्थल पर पहले से कच्ची सड़क मौजूद है और विवाद केवल उसे पक्की सड़क में परिवर्तित करने को लेकर है. कोर्ट ने अपेक्षा जताई थी कि पूरी प्रक्रिया मॉनसून शुरू होने से पहले हर हाल में पूरी कर ली जाए.
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