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हाईकोर्ट ने आदेश का अनुपालन नहीं होने पर DSE पलामू को किया तलब

हाईकोर्ट ने पलामू के सहायक शिक्षक नंदू राम की अवमानना याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश कर अनुपालन नहीं होने पर जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) पलामू को 5 अगस्त को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने उनसे पूछा है कि आदेश का अनुपालन नहीं होने पर क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए.
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कोर्ट-कचहरी की खबरें

Ranchi: हाईकोर्ट ने पलामू के सहायक शिक्षक नंदू राम की अवमानना याचिका पर सुनवाई की. कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश कर अनुपालन नहीं होने पर जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) पलामू को 5 अगस्त को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने उनसे पूछा है कि आदेश का अनुपालन नहीं होने पर क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए.


पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि एकल पीठ के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए प्रार्थी को पुनर्बहाली के पहले के सारे लाभ दिए जाएं. कोर्ट ने सरकार द्वारा 8 सप्ताह का समय मांगे जाने की आवेदन को खारिज कर दिया. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने पक्ष रखा. उनकी ओर से कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट रूल 393 के तहत नोटिस के बाद मई 2026 में प्रार्थी को पुनर्बहाल कर लिया गया, लेकिन जिस अवधि में अनुचित रूप से उन्हें नौकरी से हटाया गया था, उस अवधि का लाभ नहीं दिया गया. जबकि एकल पीठ ने इन्हें पुनर्बहाल करने और सभी पावनाओं का भुगतान करने का निर्देश दिया था. 


लेकिन हाईकोर्ट रूल 393 के नोटिस के बाद सिर्फ दिखावे के लिए इन्हें पुनर्बहाल किया गया और एकल पीठ के आदेश का पालन नहीं किया गया. एकल पीठ द्वारा पुनर्बहाली के आदेश को सरकार ने अपील दायर कर चुनौती दी थी, वह भी खारिज हो चुकी है. ऐसे में प्रार्थी को एकल पीठ के आदेश के अनुरूप उन्हें सारे लाभ दिलाए जाए. दरअसल शिक्षक नंदू राम की नियुक्ति 31 दिसंबर 1999 को सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी.
वे पलामू जिले के सरकारी मध्य विद्यालय, विश्रामपुर में पदस्थापित थे. सेवा के करीब 5 वर्ष बाद वे गभीर अवसाद (एक्यूट डिप्रेशन) से पीड़ित हो गए और इलाज के लिए अवकाश पर चले गए. इसके बाद उन्होंने विभाग को अवकाश बढ़ाने के लिए आवेदन भी भेजा था. अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, नंदू राम वर्ष 2004 से लगातार अवकाश पर थे. 


लंबे इलाज के बाद जब उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित किया गया, तब वे 19 जनवरी 2012 को स्कूल में योगदान देने पहुंचे, लेकिन उन्हें ज्वाइन करने नहीं दिया गया था और उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला दिया था. इसके खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दाखिल की थी. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज कर दी थी.

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