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100 फीसदी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने पर हाईकोर्ट में 18 मार्च को फिर सुनवाई

Ranchi: महिला सुपरवाइजरों की नियुक्ति मामले में आकांक्षा कुमारी सहित अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस एमएस सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई जारी रही. मामले में खंडपीठ ने एके मेहता को एमिकस क्यूरी बनाया है. 


अगली सुनवाई 18 मार्च को 2:15 बजे दोपहर में होगी. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता चंचल जैन और अन्य में पक्ष रखा. वहीं जेएसएससी के अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा. जबकि सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा.

 

एकल पीठ ने मामले को भेजा था खंडपीठ में 


दरअसल मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने इस मामले को सक्षम हाईकोर्ट की खंडपीठ में भेजने का निर्देश दिया था. जिसके बाद  हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की कोर्ट इस मामले की सुनवाई कर रही है.  एकल पीठ ने इस बिंदु पर निर्णय के लिए खंडपीठ को भेजा है कि क्या कोई पद शत-प्रतिशत  महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकता है या नहीं.    

 

क्या कहा था सरकार ने

 

हाईकोर्ट की एकल पीठ को महाधिवक्ता राजीव रंजन ने को बताया था कि महिला सुपरवाइजरों का पद  सिर्फ महिला कैडर के लिए ही निकाली गई है. क्योंकि इस पद के लिए टारगेटेड ग्रुप (गर्भवती महिला, नवजात शिशु को जन्म देने वाली महिला आदि) ही हैं. महिला सुपरवाइजरों का कार्य महिलाओं से ही जुड़ा हुआ है,  इसलिए यह पद सिर्फ महिला कैडर के लिए ही बनाया गया है.  देश के अन्य राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था है.

 

क्या कहा था प्रार्थी ने

 

 वहीं प्रार्थी की ओर से कहा गया कि नियुक्ति में किसी वर्ग को शत-प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. इसमें सिर्फ महिलाओं से आवेदन मांगा गया है.   

 

क्या है मामला


जेएसएससी ने बाल कल्याण विभाग में महिला सुपरवाइजर के 421 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था. प्रार्थी भी इस परीक्षा में शामिल हुए, लेकिन आयोग की ओर से प्रार्थियों का चयन यह कहते हुए नहीं किया गया कि इनकी शैक्षणिक योग्यता विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप नहीं है. 
प्रार्थियों के पास विज्ञापन में निर्धारित मुख्य विषय की बजाय सहायक विषयों की डिग्री है. जबकि नियुक्ति नियमावली में ऐसा नहीं है. सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि नियुक्ति में किसी वर्ग को शत-प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. इसमें सिर्फ महिलाओं से आवेदन मांगा गया है.

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