- पहली बार में विदेशी होने के एक्ट में उसे सजा मिली तो दूसरी बार में महिला बरी कैसे हुई?
- महिला के बरी होने को सरकार ने चुनौती क्यों नहीं दी गई?
- गृह सचिव कोर्ट में हुई हाजिर, 2:15 बजे फिर सुनवाई
Ranchi News : हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद महिला कैदी से दुष्कर्म करने के मामले में तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है. इन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. डालसा ने अपनी रिपोर्ट में महिला कैदी के साथ दुष्कर्म करने का उल्लेख किया है. दूसरी पाली में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट को इस बात की जानकारी दी गई.
मामले में दोबारा दोपहर 2:15 बजे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि महिला को बांग्लादेश डिपोर्ट करने के संबंध में वर्ष 2023 से ही राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स को पत्र लिखा जा रहा है. लेकिन वहां से अब तक कोई जवाब नहीं आया है. इसपर कोर्ट ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को इस बिंदु पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है.
वहीं राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर यह भी बताया गया कि महिला से रेप के मामले में तीन कांस्टेबल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, इन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. कोर्ट ने आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ किए गए प्राथमिकी में आईपीसी की धारा लगाये जाने पर भी सरकार से सवाल जवाब किया. इस पर सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने कोर्ट को बताया कि प्राथमिकी में आवश्यक संशोधन कर दिया जाएगा.
कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ित महिला को डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान आवश्यक सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दिया. मामले में महिला के रेप के संबंध में DALSA की ओर से सीलबंद रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें महिला के साथ तीन पुलिसकर्मियों द्वारा रेप की बात सामने आई है. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर निर्धारित करते हुए प्रार्थी को राज्य सरकार के जवाब पर अपना प्रतिउत्तर देने को कहा है.
इससे पहले सुबह भी मामले में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार से मौखिक रूप से पूछा, विदेशी होने के एक्ट में महिला को वर्ष 2021 में सजा मिलने के बाद फिर दोबारा वर्ष 2025 में इस एक्ट में केस क्यों किया गया? वर्ष 2026 केस में महिला विदेशी एक्ट से संबंधित मामले में बरी हो चुकी है, जबकि वर्ष 2021 में उसे 3 साल की सजा मिली थी. वर्ष 2026 में महिला के विदेशी एक्ट में बरी होने के बाद सरकार ने अपील क्यों दाखिल नहीं की?
अगर महिला को वर्ष 2021 में विदेशी मान लिया गया था तो उसी समय उसे विदेश क्यों नहीं भेजा गया. हजारीबाग डिटेंशन सेंटर क्यों भेजा गया? इसपर कोर्ट में उपस्थित गृह सचिव ने कोर्ट को बताया कि सरकार की ओर से बांग्लादेश सरकार से उसी समय संपर्क किया गया था, लेकिन वहां से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया था. महाधिवक्ता रोहित राय ने कोर्ट से समय देने का आग्रह करते हुए कहा कि वह सरकार से कुछ इंस्ट्रक्शन लेना चाहते हैं. जिसपर कोर्ट ने आज 2:15 बजे फिर से सुनवाई निर्धारित की.
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अंकित अपूर्वा ने पक्ष रखा. इससे पहले सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि महिला के खिलाफ वर्ष 2018 में दो केस हुए, इसमें एक बच्चा अपहरण का केस तथा दूसरा विदेशी एक्ट से संबंधित केस किया गया था. बच्चा अपहरण चोरी केस में महिला को 2 साल की सजा मिली थी.
वहीं वर्ष 2021 में उसे विदेशी एक्ट मामले में 3 साल की सजा मिली थी. बाद में उसे हजारीबाग डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया था. जहां से वह वर्ष 2025 के अंत में भागी थी. इसके बाद उसके खिलाफ विदेशी एक्ट से संबंधित एक केस भी किया गया, जिसमें वर्ष 2026 में वह बरी हो गई. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई.
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