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पुलिस ने रातों-रात रीना देवी को रीना खान बनाया, सजा पूरी होने के बाद भी है डिटेंशन सेंटर में

Ranchi News: रीना देवी को रातों-रात रीना खान बनाने और उसे हिंदू से मुसलमान बनाने का मामला समाज सेविका अपूर्वा विवेक द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में Habeas Corpus दायर करने के बाद सामने आया है. रीना देवी को रीना खान बनाने की पूरी घटनाक्रम में दो महत्वपूर्ण सवाल हैं. इसमें पहला सवाल यह कि बच्चा चोरी के आरोप में 4-2-2020 को दो साल की सजा पूरी होने के बाद उसे जामताड़ा जेल से रिहा करने के बदले हजारीबाग सेंट्रल जेल के अधीन विदेशी नागरिकों के लिए बने डिटेंशन सेंटर में किस आधार पर भेजा गया.
 
सांकेतिक तस्वीर

Jharkhand News: पुलिस ने रातों रात रीना देवी को रीना खान बना दिया. उसे बांग्लादेशी नागरिक बताया. लेकिन इसे साबित करने में असफल होने की वजह से कोर्ट ने उसे Foreigners Act के आरोप में बरी कर दिया. बच्चा के अपहरण के आरोप में वह दो साल की सजा 2020 में पूरी कर चुकी है. फिर भी वह डिटेंशन सेंटर में कैद है. रीना ने डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान एक सिपाही द्वारा दुष्कर्म करने का आरोप भी लगाया है. मामला झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

 

रीना देवी को रातों-रात रीना खान बनाने और उसे हिंदू से मुसलमान बनाने का मामला समाज सेविका अपूर्वा विवेक द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में Habeas Corpus दायर करने के बाद सामने आया है. रीना देवी को रीना खान बनाने की पूरी घटनाक्रम में दो महत्वपूर्ण सवाल हैं. 

 

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रीना देवी से हुए दुष्कर्म के शिकायत की कॉपी 

 

पहला सवालः बच्चा चोरी के आरोप में 4 फरवरी 2020 को दो साल की सजा पूरा होने के बाद उसे जामताड़ा जेल से रिहा करने के बदले हजारीबाग सेंट्रल जेल के अधीन विदेशी नागरिकों के लिए बने डिटेंशन सेंटर में किस आधार पर भेजा गया?

 

दूसरा सवालः सजा पूरी होने के बावजूद इस महिला के डिटेंशन सेंटर में रहने का मामला विचाराधीन कैदियों और गरीब कैदियों की स्थिति और मदद के लिए बनी समितियों के सामने क्यों नहीं आया? हजाराबीग स्थित जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा के अधीक्षक ने इन समितियों की बैठकों में इस मामले की जानकारी क्यों नहीं दी?

 

जानकारी के मुताबिक जामताड़ा थाना में दो फरवरी 2018 को बच्चा के अपहरण के आरोप में एक प्राथमिकी (19/2018) दर्ज हुई थी. पुलिस ने 4 फरवरी 2018 को इस मामले में रीना देवी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया. कोर्ट ने उसी दिन संज्ञान लिया और रीना को जामताड़ा जेल भेज दिया गया. कोर्ट ने इस मामले में 15 दिसंबर 2018 को फैसला सुनाते हुए रीना देवी को दो साल जेल की सजा दी. न्यायालय ने उसके द्वारा जेल में पूर्व में बिताये गये समय को भी सजा की अवधि में गिनने का आदेश दिया. इस आदेश के आलोक में रीना देवी की सजा 4 फरवरी 2020 को पूरी हो गयी.

 

दो साल की सजा काटने के बाद जामताड़ा जेल से रीना को रिहा करने के बदले हजारीबाग सेंट्रल जेल के अधीन विदेशी नागरिकों के लिए बने डिटेंशन सेंटर में भेज दिया गया. उसे डिटेंशन सेंटर में किस आधार पर भेजा गया, यह अब तक रहस्य बना हुआ है.

 

जामताड़ा जेल में रहने के दौरान उसे विदेशी नागरिक कब बनाया गया? इससे संबंधित कोई जानकारी Habeas Corpus में उपलब्ध नहीं है. हाईकोर्ट में दायर Habeas Corpus में यह कहा गया है कि जामताड़ा जेल में रहने के दौरान ना तो उसे विदेशी नागरिक होने के सिलसिले में कोई नोटिस मिला ना ही उसने इस तरह के मामले में ट्रायल का सामना किया.

 

वर्ष 2025 में वह दो अन्य महिलाओं के साथ डिटेंशन सेंटर से भाग गयी. लेकिन 9 जून 2025 को धनबाद रेलवे स्टेशन पर वह पकड़ी गयी. इसके बाद उसे 10 जून 2025 को धनबाद से हजारीबाग के लोहसिंगना थाना में लाया गया. 10 जून 2025 को ही उसे रातों-रात रीना देवी से रीना खान बना दिया गया. साथ ही उसका धर्म भी बदलकर हिंदू से मुसलमान कर दिया गया. इस सिलसिले में लोहसिंगना थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी. इसमें उसे सरकारी आदेश के सामूहिक उल्लंघन  (BNS की धारा 262 सहपठित धारा 3(5) और Foreigners Act 1946 की धारा 14 के तहत अवैध रूप से भारत में रहने का आरोप लगाते हुए अभियुक्त बनाया गया.

 

लोहसिंगना थाने में दर्ज इस मामले में एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने 9 जुलाई 2025 को रीना देवी को जमानत दे दी. लेकिन बेल बॉन्ड नहीं भर पाने की वजह से वह जेल से नहीं निकल सकी. इसलिए वह जमानत मिलने के बाद भी जेल में ही रही. 20 जुलाई 2026 को हजारीबाग एजिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया. 

 

कोर्ट ने रीना देवी को सरकारी आदेश के सामुहिक उल्लंघन के आरोप में छह महीने की सजा दी. इसे जेल में पहले बितायी गयी अवधि में समायोजित करने का आदेश दिया. रीना देवी पर विदेशी नागरिक के सिलसिले में लगाये गये आरोपों को पुलिस कोर्ट में साबित नहीं कर सकी. इसलिए उसे कोर्ट ने उसपर Foreigners Act 1946 की धारा 14 के तहत लगाये गये आरोपों से बरी कर दिया. इस तरह वह 2020 में अपनी सजा पूरी करने के बाद कोर्ट के आदेश के बिना ही डिटेंशन सेंटर में कैद है.

 

समाज सेविका अपूर्वा द्वारा दायर याचिका को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है. झालसा (Jharkhand State Legal Services Authority)  और डालसा (District Legal Services Authority) को भी मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट को देने का आदेश दिया है.

 

मामले में हाईकोर्ट के सख्त रवैये को देखते हुए गृह विभाग ने हजारीबाग के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को जांच कर यह बताने को कहा है कि सजा पूरी होने के बावजूद किस आदेश के तहत रीना देवी को डिटेंशन सेंटर में रखा गया है. जामताड़ा के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को रीना देवी की नागरिकता, जन्म स्थान और शिक्षा आदि से संबंधित जानकारी मांगी गयी है.

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