- 5 अक्टूबर को गृह सचिव व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में होंगे पेश
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में बंद महिला को आपराधिक मामले में बरी किए जाने के बाद भी हिरासत में रखे जाने के मामले को गंभीरता से लिया है. अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर किस कानूनी अधिकार के तहत बरी होने के बाद भी महिला को जेल या डिटेंशन सेंटर में रखा गया. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की ओर से दायर की सुनवाई के दौरान को यह निर्देश दिया.
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गृह सचिव 5 अक्टूबर को होंगे पेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे 5 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने झारखंड सरकार के गृह सचिव को 5 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है.
अदालत ने हजारीबाग डीएलएसए की रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में रिकॉर्ड पर रखने तथा हजारीबाग एसपी की रिपोर्ट भी अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया है.
याचिका में महिला को अदालत के समक्ष पेश करने, उन्हें तत्काल हिरासत से मुक्त करने और कथित अवैध हिरासत की अवधि के लिए मुआवजा देने की मांग की गयी है. इसके अलावा याचिका में पुलिसकर्मी रंजीत महतो पर वर्ष 2020 से 2022 के दौरान कथित यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की गयी है.
बरी होने के बाद भी हिरासत में रखने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी ने वर्चुअल माध्यम से अदालत को बताया कि जीआर केस संख्या 1647/2025, जो लोहसिंघना थाना कांड संख्या 88/2025 से संबंधित है, उसमें महिला को बरी किया जा चुका है. इसके बावजूद वह हिरासत में हैं.
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के सदस्य सचिव को निर्देश दिया कि हजारीबाग डीएलएसए के सचिव और उनकी टीम को भेजकर महिला का बयान दर्ज कराया जाए और जांच रिपोर्ट पेश की जाए. सुनवाई के दौरान झालसा के सदस्य सचिव वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए और बताया कि डीएलएसए सचिव अपनी टीम के साथ महिला का बयान दर्ज करने के लिए पहुंच चुके हैं.
पुलिसकर्मी पर दुष्कर्म के आरोप
याचिका में लगाए गए आरोपों में एक पुलिस कांस्टेबल रंजीत महतो द्वारा महिला के साथ कथित तौर पर लगातार दो वर्षों तक दुष्कर्म किए जाने की बात कही गयी है. इस संबंध में शिकायत भी किए जाने की बात अदालत को बतायी गयी.
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने हजारीबाग एसपी को वर्चुअल माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया. एसपी ने अदालत को आश्वस्त किया कि रंजीत महतो पर लगाए गए कथित कृत्य की तत्काल और विस्तृत जांच शुरू की जाएगी. उन्होंने महिला की डिटेंशन सेंटर में समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने आईजी, जेल को भी सुनवाई में शामिल होने को कहा. एएजी-III अशुतोष आनंद ने राज्य सरकार की ओर से मामले की पूरी जांच कराने की बात कही.
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