New Delhi : कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC कार्यालय में हुई ED रेड मामले में आज गुरुवार को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और बंगाल पुलिस को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया. कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह का समय दिया.
#WATCH | Delhi | BJP leader Gaurav Bhatia says, "Mamata Banerjee today suffered a big jolt from the Supreme Court. It has proved what jungle raj looks like...The state government is to aid and assist an investigative agency, but Mamata Banerjee took away the files. It is a slap… pic.twitter.com/S794eIMbMS
— ANI (@ANI) January 15, 2026
सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह आदेश दिये जाने के बाद भाजपा नें ममता बनर्जी की सरकार पर हल्ला बोला है. भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने प्रेस कॉंफ्रेस कर कहा कि ममता बनर्जी को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है.
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ममता के कृत्य ने साबित कर दिया है कि जंगल राज कैसा दिखता है. कहा कि राज्य सरकार को एक जांच एजेंसी की मदद करनी होती है, लेकिन ममता बनर्जी ने उनसे (ED अधिकारियों) फाइलें छीन लीं.
भाजपा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सीएम ममता बनर्जी के चेहरे पर तमाचा है, जो सोचती हैं कि वह संविधान से ऊपर हैं. गौरव भाटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ED अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर एफआईआर पर रोक लगा दी है.
मामला यह है कि ED ने बंगाल पुलिस अधिकारियों पर ममता सरकार की मदद करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है सुप्रीम कोर्ट ने आज दोनों पक्षों की दलीलें सुन कर कहा कि कोई केंद्रीय एजेंसी किसी गंभीर अपराध की जांच के लिए ईमानदारी से काम कर रही हो, तो किसी पार्टी को किसी एजेंसी के काम में रुकावट नहीं डालनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और बंगाल पुलिस को जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया. कोर्ट ने दो सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है. इस मामले की सुनवाई अब 3 फरवरी को होगी. साथ ही बैंच में शामिल जस्टिस पीके मिश्रा ने आदेश दिया कि ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगी. कोर्ट ने कहा कि एजेंसी की जांच में दखल नहीं दिया जा सकता है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून का राज बनाये रखने और हर एजेंसी को आज़ादी से काम करने देने के लिए इस मामले की जांच जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि इस याचिका में कानून से जुड़े बड़े सवाल शामिल हैं. उन्हें सुलझाए बिना स्थिति और गंभीर हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका हल यदि नहीं निकाला गया तो एक या ज़्यादा राज्यों में अराजकता फैल सकती है. बेंच ने इस बात को स्पष्ट किया कि किसी भी एजेंसी को चुनाव के काम में दखल देने का अधिकार नहीं है.
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