Washington : अमेरिका स्थित इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IFPRI) की ताजा रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले समय में दक्षिण एशिया क्लाइमेट चेंज का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन सकता है. इस रिपोर्ट के अनुसार साल 2100 तक दक्षिण एशिया का तापमान 1.2 से 4.3 डिग्री सेल्सियस, जबकि भारत का तापमान 2.4 से 4.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. रिपोर्ट की मानें तो क्लाइमेट चेंज की वजह से भारत में हीट वेव की घटनाएं भी तीन से चार गुना तक बढ़ सकती हैं.
2030 तक नौ करोड़ भारतीयों को भुखमरी का सामना करना पड़ेगा
जलवायु परिवर्तन का कहर आने वाले सालों में और ज्यादा बढ़ने वाला है, जिस कारण भारत की नौ करोड़ से ज्यादा आबादी पर भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है. द ग्लोबल फूड पॉलिसी रिपोर्ट 2022 में कहा गया कि 2030 तक नौ करोड़ भारतीयों को भुखमरी का सामना करना पड़ेगा. रिपोर्ट केअनुसार आने वाले वाले 70-80 सालों में फसलों की पैदावर में काफी कमी आयेगी और हीट वेव एंव गर्मी का स्तर भी कई गुना ज्यादा बढ़ जायेगा.
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सत्र : महंगाई, GST पर आज भी विपक्षी दलों का संसद भवन परिसर में प्रदर्शन, कहा, पीएम मोदी खुद सदन में आयें, चर्चा करायें भारत में भीषण गर्मी हर साल रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है
बता दें कि भारत में भीषण गर्मी हर साल रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है. इस साल उत्तर भारत में गर्मी अभी भी झुलसा रही है. जान लें कि गर्मी के मौसम में राजधानी दिल्ली समेत कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री के पार चला गया था. रिपोर्ट कहती है कि बद से बदतर हालात आने वाले समय में हो सकते हैं. क्योंकि इस सदी के आखिर तक भारत का तापमान लगभग साढ़े 4 डिग्री तक बढ़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लाइमेट चेंज से निपटने के लिए अलग-अलग देश अपने-अपने स्तर पर कदम उठा रहे हैं, लेकिन दक्षिण एशियाई देश इसमें काफी पिछड़ गये हैं. हालांकि इंटरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की प्रिंसिपल रिसर्चर अदिती मुखर्जी कहती हैं कि वैश्विक औसत तापमान की तुलना में दक्षिण एशिया का औसत तापमान थोड़ा कम बढ़ा है.
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में गंगा नदी के तेज बहाव में बहे 18 कावड़िए, आर्मी के तैराक दल व एसडीआरएफ ने बचाया दक्षिण एशिया में बाढ़ आने या सूखा पड़ने की घटनाएं काफी बढ़ गयी हैं
IFPRI की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों से तापमान बढ़ने, सूखा पड़ने और बाढ़ आने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं. इन घटनाओं के कारण प्रोडक्टिविटी और प्रोडक्शन पर असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में दर्ज है कि 1980 के दशक के बाद से दक्षिण एशिया में बाढ़ आने या सूखा पड़ने की घटनाएं काफी बढ़ गयी है. भारत की बात करें तो यहां कुछ दशकों से गर्मियों में होने वाली बरसात में कमी आयी है. इसी क्रम में पाकिस्तान में सूखे की तीव्रता और गंभीरता बढ़ गयी है.
समुद्रों और तालाबों का पानी और खारा होता जा रहा है
रिपोर्ट के अनुसार भारत में कुछ जगहों पर कम समय में ज्यादा बारिश होने से बाढ़ का खतरा बढ़ा है. सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी में बाढ़ का खतरा ज्यादा बढ़ा है. दूसरी ओर, उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवाती तूफान थोड़े कम जरूर हुए हैं, लेकिन मॉनसून के बाद बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान बढ़ गये हैं. रिपोर्ट पर नजर डालें तो, नजर आता है कि समुद्रों और तालाबों का पानी और खारा होता जा रहा है, जिससे मछलियों की आबादी कम हो रही है. रिपोर्ट के अनुसार अगर सही दिशा में कदम नहीं उठाये गये तो अगले 30 साल में दक्षिण एशिया में जीरो हंगर के टारगेट को हासिल नहीं किया जा सकेगा. रिपोर्ट्स कहती है कि फूड सिस्टम में क्लाइमेट से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हर साल 350 बिलियन अमेरीकी डॉलर की जरूरत पड़ेगी. [wpse_comments_template]
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