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JNAC में अवैध निर्माण मामला : हाईकोर्ट से एक प्रतिवादी को राहत, भवन तोड़ने के आदेश पर रोक

जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े मामले में झारखंड हाई कोर्ट से एक प्रतिवादी को राहत मिली है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सोमवार को राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर सुनवाई की.
 
  • हाईकोर्ट ने जेएनएसी को सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण तोड़ने का दिया था आदेश

Ranchi :   जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े मामले में झारखंड हाई कोर्ट से एक प्रतिवादी को राहत मिली है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सोमवार को राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर सुनवाई की.

 

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 13 (कहकश नाहिद) की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उनके पक्ष को हाई कोर्ट में नहीं सुना जा सका है. उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने कई प्रतिवादियों के लिए अवैध निर्माण मामले में यथा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. 

 

इसके बाद कोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 13 के अवैध निर्माण पर यथास्थिति बनाने रखने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई की तिथि 9 मार्च निर्धारित की है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता निरंजन कुमार ने पक्ष रखा. प्रार्थी ने राकेश कुमार झा की जनहित याचिका में हाईकोर्ट के 14 और 28 जनवरी 2026 को पारित आदेशों का हवाला दिया है.

 

हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई थी चुनौती

यह मामला झारखंड हाईकोर्ट द्वारा 14 जनवरी 2026 को पारित उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर जेएनएसी को अवैध भवनों को तोड़ने का आदेश दिया गया था. 

 

इसके बाद प्रतिवादियों द्वारा दायर आवेदनों को हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को खारिज कर दिया था. राकेश कुमार झा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायक कर इन दोनों आदेशों  को चुनौती दी थी. 

 

हाईकोर्ट ने JNAC को अवैध निर्माण तोड़ने का दिया था आदेश

बता दें कि राकेश कुमार झा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जेएनएसी को सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण तोड़ने का आदेश दिया था. प्रतिवादियों ने हाई कोर्ट के 14 जनवरी 2026 के आदेश में संशोधन करने का आग्रह कोर्ट से किया था.

 

साथ ही भवनों को तोड़ने के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि अवैध निर्माण किसी रूप में बर्दाश्त नहीं की जा सकती है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही आदेश दिया था. 

 

 

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