NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर आयी है. SC ने राजद्रोह कानून (Sediton Law)पर पुनर्विचार किये जाने तक इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. इस क्रम में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा कि पुनर्विचार किये जाने तक राजद्रोह कानून यानी 124ए के तहत कोई नया मामला दर्ज न किया जाये. हालांकि जो केस चल रहे हैं, वो चलते रहेंगे. जिनके खिलाफ केस चल रहे हैं, वो कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं और जमानत के लिए भी आवेदन कर सकते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे कानून के दुरुपयोग की आशंका से चिंतित है. इसलिए राज्य सरकारें और केंद्र राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार करे. अब इस मामले में सुनवाई 3 जुलाई को होगी. जान लें कि राजद्रोह कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के मामले पर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इसे भी पढ़ें : सुब्रमण्यम">https://lagatar.in/subramanian-swamy-said-india-should-send-army-to-sri-lanka-sri-lankans-got-furious-venting-anger/">सुब्रमण्यमSedition Law | Supreme Court allows the Central government to re-examine and reconsider the provisions of Section 124A of the IPC which criminalises the offence of sedition. Supreme Court says till the exercise of re-examination is complete, no case will be registered under 124A. pic.twitter.com/xrjHNyLbA6
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— ANI (@ANI) May">https://twitter.com/ANI/status/1524271649667043329?ref_src=twsrc%5Etfw">May
11, 2022
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इस कानून पर रोक न लगाई जाये
इस क्रम में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि हमने राज्य सरकारों को जारी किये जाने वाले निर्देश का मसौदा तैयार किया है. उसके अनुसार राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश होगा कि बिना जिला पुलिस कप्तान यानी एसपी या उससे ऊंचे स्तर के अधिकारी की मंजूरी के राजद्रोह की धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं की जायेगी. इस दलील के साथ सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट से कहा कि फिलहाल इस कानून पर रोक न लगाई जाये. इसे भी पढ़ें : प्रशांत">https://lagatar.in/prashant-kishor-said-pm-modi-has-put-bjp-on-a-path-where-it-is-not-easy-to-challenge-it/">प्रशांतकिशोर ने कहा, पीएम मोदी ने भाजपा को ऐसे रास्ते पर पहुंचा दिया है जहां उसे चुनौती देना आसान नहीं…
कानून पर पुनर्विचार तक वैकल्पिक उपाय संभव है
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि पुलिस अधिकारी राजद्रोह के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने के समर्थन में पर्याप्त कारण भी बतायेंगे. उन्होंने कहा कि कानून पर पुनर्विचार तक वैकल्पिक उपाय संभव है. आंकड़ों की बात पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह जमानती धारा है, अब सभी लंबित मामले की गंभीरता का विश्लेषण या आकलन कर पाना तो मुश्किल है. ऐसे में कोर्ट अपराध की परिभाषा पर रोक कैसे लगा सकता है? यह उचित नहीं होगा. इसे भी पढ़ें : IAS">https://lagatar.in/ed-raids-the-whereabouts-of-abhijit-sen-a-close-aide-of-ias-pooja-singhal/">IASपूजा सिंघल के करीबी अभिजीत सेन के ठिकाने पर ईडी की छापेमारी
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