Ranch : झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों नर्सिंग कर्मियों की भारी कमी और कमजोर प्रबंधन के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में ग्रेड-वन नर्सों के करीब 40 प्रतिशत और Auxiliary Nurse Midwife ( एएनएम) के 25 प्रतिशत पद खाली हैं.
आंकड़ों के अनुसार, 1,325 स्वीकृत ग्रेड-वन पदों में सिर्फ 810 नर्सें कार्यरत हैं. जबकि एएनएम के 10,117 पदों में से केवल 7,539 पर ही कर्मी तैनात हैं. स्थिति यह है कि नियमित नियुक्तियां नहीं होने के कारण रिम्स और सदर अस्पताल जैसे बड़े सरकारी संस्थानों में आउटसोर्सिंग के जरिए व्यवस्था चलाई जा रही है.
आउटसोर्स पर काम करने वाली नर्सों को 12 हजार से 16 हजार रुपये तक के कम वेतन में अधिक काम करना पड़ रहा है. लगातार बढ़ते कार्यभार और नौकरी में स्थायित्व नहीं मिलने से प्रशिक्षित नर्सें अब झारखंड छोड़कर दिल्ली, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों का रुख कर रही हैं.
नर्सों की कमी का सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ रहा है. कई अस्पतालों में एक नर्स को एक साथ कई वार्डों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है. इसका असर खासकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर देखा जा रहा है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आउटसोर्सिंग आधारित व्यवस्था से न सिर्फ नर्सिंग कर्मियों का शोषण हो रहा है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी लगातार गिर रही है. नर्सिंग संगठनों ने राज्य सरकार से जल्द स्थायी नियुक्तियां निकालने और वेतनमान में सुधार करने की मांग की है.
उनका कहना है कि अगर समय रहते रिक्त पद नहीं भरे गए, तो आने वाले समय में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है.
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