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झारखंड में वित्त विभाग के आदेश का खिलाफ एक इंजीनियर को पांच सीनियर पद

Ranchi News: वित्त विभाग जूनियर अधिकारियों को सीनियर पद पर पदस्थापित करने पर पाबंदी लगा रखी है. लेकिन इस आदेश के खिलाफ अधीक्षण अभियंता मनोहर कुमार को अभियंता प्रमुख सहित पांच पदों पर पदस्थापित रखा गया है. इससे उनसे सीनियर इंजीनियरों को उनके अधीन काम करना पड़ रहा है.
 
मनोज कुमार की फाइल फोटो

Ranchi News: वित्त विभाग जूनियर अधिकारियों को सीनियर पद पर पदस्थापित करने पर पाबंदी लगा रखी है. लेकिन इस आदेश के खिलाफ अधीक्षण अभियंता मनोहर कुमार को अभियंता प्रमुख सहित पांच पदों पर पदस्थापित रखा गया है. इससे उनसे सीनियर इंजीनियरों को उनके अधीन काम करना पड़ रहा है.


मनोहर कुमार पथ निर्माण विभाग के 1997 बैच के इंजीनियर हैं. उन्हें अधीक्षण अभियंता के पद पर नियमित प्रोन्नति मिल चुकी है. वह पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख और मुख्य अभियंता यातायात के पद पर पदस्थापित थे. सरकार ने पिछले दिनों उनकी सेवा ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी थी. फिलहाल वह ग्रामीण कार्य विभाग (REO) के प्रभारी अभियंता प्रमुख हैं. REO के मुख्य अभियंता भी हैं. इसके अलावा वह विशेष प्रमंडल और झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकार(JSRDA) के भी अभियंता प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं. पथ निर्माण विभाग ने उनकी सेवा ग्रामीण विकास को सौंप दी है लेकिन वह पथ निर्माण(यातायात) के मुख्य अभियंता के रूप में भी कार्यरत हैं.

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ग्रामीण कार्य विभाग में 1995 के दो इंजीनियर हैं. दोनों अधीक्षण अभियंता में नियमित रूप से प्रोन्नत है. 1995 के इंजीनियर गोपाल मंडल फिलहाल दुमका में अधीक्षण अभियंता के पद पर पदस्थापित हैं. 1995 बैच के ही सुबोध पासवान JSRDA में पदस्थापित हैं. गोपाल मंडल और सुबोध पासवान दोनों ही मनोहर कुमार से सीनियर हैं. लेकिन मनोहर को अभियंता प्रमुख के रूप में कार्यरत होने की वजह से दोनों उनके अधीनस्थ अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं.


मनोज कुमार का अभियंता प्रमुख के रूप में कार्यरत रहना वित्त विभाग द्वारा 19-5-2026 को जारी  आदेश (1630) के खिलाफ है. वित्त विभाग ने इस आदेश से जूनियर अधिकारियों को सीनियर पद पर पदस्थापित करने पर रोक लगा रखी है. इसकी वजह कोर्ट जूनियर अधिकारी के सीनियर पद से रिटायर होने के बाद उसे सीनियर पद के अनुरूप बकाया वेतन और पेंशन देना का न्यायिक आदेश है.


उल्लेखनीय है कि बिंदेश्वर रविदास कार्यपालक अभियंता के पद पर नियमित रूप से प्रमोन्त थे. सरकार ने उन्हें अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता का चालू प्रभार दिया गया था. वह मुख्य अभियंता के चालू प्रभार वाले पद पर काम करने के दौरान रिटायर हो गये. लेकिन सरकार ने कार्यापलक अभियंता के वेतन के अनुरूप उनका पेंशन निर्धारित किया. इसके बाद बिंदेश्वर रवि दास ने कोर्ट में पीटिशन दायर कर कार्यपालक अभियंता और मुख्य अभियंता के वेतन के अंतर की राशि और मुख्य अभियंता के वेतन मान के अनुरूप पेंशन देने की मांग की. हाईकोर्ट ने उन्हें वेतन के अंतर की राशि और मुख्य अभियंता के वेतन के अनुरूप पेंशन देने का आदेश दिया. 

 

सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गयी. लेकिन हार गयी. चंदा हेम्ब्रम के मामले में यही स्थिति हुई. इसके बाद वित्त विभाग ने जूनियर अफसर को सीनियर पद पर पदस्थापित करने पर पाबंदी लगा दी.

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