Jharkhand News: झारखंड में नियुक्तियों के दौरान हुए भ्रष्टाचार ने नेताओं और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को जबरन अफसर बना दिया गया है. जिन नेताओं के रिश्तेदारों को अफसर बनाया गया है, उसमें पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मंत्री सुदेश महतो, वर्तमान मंत्री राधा कृष्ण किशोर का नाम शामिल है. जबरन अफसर बनाये जाने वालों में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष और सदस्यों (दिलीप प्रसाद, गोपाल प्रसाद, राधा गोविंद नागेश, शांति देवी के पारिवारिक सदस्यों और रिश्तेदार शामिल हैं. आयोग के एक सदस्य की बेटी ने तो पहचान के लिए कॉपी पर “ओम साईं नाथ” लिख दिया था.
मुकेश महतो, पूर्व मंत्री सुदेश महतो के भाई
मुकेश महतो को पुलिस सेवा में डीएसपी के पद पर नियुक्त किया गया है. वह राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो के भाई हैं. उन्हें जेनरल स्टडीज पेपर-1 में 45 नंबर मिले थे. इसे बढ़ाकर 127 कर दिया गया था. जेनरल स्टडीज पपेर-11 में 52 नंबर मिला था. इसे बढ़ाकर 137 कर दिया गया था. गलत लिखने पर भी नंबर दिया गया था. इसी तरह अन्य विषयों में नंबर बढ़ाकर जबरन पुलिस सेवा के लिए चुना गया था.
राधा प्रेम किशोर - DSP, वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर के भाई
राधा प्रेम किशोर, वर्तमान वित्तमंत्री राधाकृष्ण किशोर के भाई हैं. राधाप्रेम किशोर की जब नियुक्ति हुई थी उस वक्त उनके भाई विधायक थे. राधाप्रेम किशोर को इतिहास पेपर-1 में 100 नंबर मिला था. उसे बढ़ाकर 122 कर दिया गया था. LSW Paper-2 में मिले 74 नंबर को बढ़ाकर 78 किया गया था. इसी तरह अन्य विषयों में नंबर बढ़ाया गया था और पुलिस सेवा में 26वां रैक दिया गया था. नंबर नहीं बढ़ाने पर राधाप्रेम किशोर का सेलेक्शन पुलिस सेवा के लिए नहीं किया जा सकता था.
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बिनोद राम, आयोग सदस्य शिंत देवी का भाई
राज्य प्रशासनिक सेवा में नियुक्त बिनोद राम, आयोग के सदस्य शांति देवी के भाई हैं. मुख्य लिखित परीक्षा में LSW Paper-11 में 92 नंबर मिला था. इसे बढ़ाकर 107 कर दिया गया था. बिनोद राम को मिला वास्तविक कुल नंबर किसी भी सेवा में चुने जाने के लायक नहीं थी. लेकिन नंबर बढ़ाकर 818.33 कर दिया गया और राज्य प्रशासनिक सेवा में नियुक्त किया गया.
कानू राम नाग, मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का पीए
कानू राम नाम को राज्य प्रशासनिक सेवा में नियुक्त किया गया था. वह तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के PA थे. उन्हें जेनरल स्टडीज पेपर-11 में 83 नंबर ही मिला था. लेकिन उसे बढ़ाकर 117 कर दिया गया था. LSW Paper-11 में 57 नंबर मिला था. इसे बढ़ाकर 131 कर दिया गया था. इसी तरह बाकी विषयों में नंबर बढ़ाकर राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए सफल घोषित किया गया था. नंबर में हेराफेरी नहीं करने से राज्य प्रशासनिक सेवा में सफल होना संभव नहीं था.
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हरिहर सिंह मुंडा, अर्जुन मुंडा करीबी रिश्तेदार
हरिहर सिंह मुंडा की नियुक्ति राज्य प्रशासनिक सेवा में की गयी थी. वह आयोग के तत्कालीन सदस्य राधा गोविंद नागेश के भतीजे और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के करीबी रिश्तेदार हैं. इन्हें मुंडारी में 128 नंबर मिला था. उसे बढ़ाकर 153 कर दिया गया था. जेनरल स्टडीज पेपर-1 में 62 नंबर मिला था. इसे बढ़ाकर 111 नंबर कर दिया गया था. इसी तरह बाकी में नंबर बढ़ाया गया और पुलिस सेवा में 72वां रैंक दिया गया.
कुंदन कुमार सिंह, आयोग के सदस्य गोपाल प्रसाद का पुत्र
कुंदन कुमार सिंह को वित्त सेवा में वाणिज्यकर अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था. वह आयोग के तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह के पुत्र हैं. इन्होंने OMR Sheet में 19 सर्किल को भरा था. लेकिन नंबर 88 दिया गया था. Optional Paper का OMR Sheet गायब है. जेनरल स्टडीज पपेर-1 में 26 नंबर मिला था. इसे बढ़ाकर 111 कर दिया गया था. इसी तरह दूसरे विषयों में नंबर बढ़ाकर जबरन वित्त सेवा के लिए चुना गया था और मेरिट लिस्ट में 70वां रैंक दिया गया था.
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मौसमी नागेश, आयोग के सदस्य की बेटी
मौसमी नागेश को वित्त सेवा में वाणिज्यकर अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था. वह आयोग के तत्कालीन सदस्य राधा गोविंद नागेश की बेटी हैं. उन्होंने अपनी पहचान जताने के लिए कॉपी पर हिंदी में ओम साईं नाथ लिख दिया था. इन्होंने PT में जेनरल स्टडीज में 50 सर्किल भरा था. लेकिन 69 नंबर दिया गया था. मुख्य लिखित परीक्षा में जेनरल स्टडीज पेपर-1 में 82 नंबर ही मिला था. इसे बढ़ाकर 137 कर दिया गया. जेनरल स्टडीज पेपर-1 में 76 नंबर मिला था. इसे बढ़ाकर 119 कर दिया गया था. बाकी विषयों में भी नंबर बढ़ाकर जबरन वित्त सेवा के लिए सफल घोषित किया गया था.
इंद्रजीत सिंह, आयोग के सदस्य गोपाल प्रसाद का भतीजा
इंद्रजीत सिंह को वाणिज्यकर अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया था. वह आयोग के तत्कालीन सदस्य गोपाल प्रसाद के भतीजा हैं. इन्होंने PT में जेनरल स्टडीज के OMR Sheet में 37 सर्किल को भरा था. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के OMR Sheet में 37 गोला भरा था. PT में फेल थे. फिर भी मुख्य लिखित परीक्षा में शामिल कराया गया और नंबर बढ़ाकर वित्त सेवा में 39वां रैंक दिया गया.
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