- - एल ख्यांग्ते के कार्यकाल में नियुक्तियों में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया.
- - राज्य सरकार के आदेश पर सीआईडी ने जांच शुरु की, 19 लोग गिरफ्तार हुए हैं.
- - जांच के दौरान पूछताछ का नोटिस मिलने पर अध्यक्ष समेत सभी तीन सदस्यों ने इस्तीफा दिया.
- - नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र आंदोलन कर रहे हैं, सरकार पशोपेश मे है.
Ranchi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के दूसरे अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के बाद एल ख्यांग्ते ऐसे अध्यक्ष हैं, जिनके कार्यकाल में नियुक्तियों के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगे. छात्रों ने जयपाल सिंह स्टेडियम में आंदोलन शुरू किया. परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन और अनशन शुरू हुआ. फिलहाल आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधि और सरकार के मंत्रियों की समिति के बीच बातचीत जारी है. लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है. आयोग के अध्यक्ष समेत सभी तीन सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा है. एल ख्यांग्ते झारखंड से सेवानिवृत्त मुख्य सचिव हैं.
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आयोग के दूसरे अध्यक्ष दिलीप प्रसाद के कार्यकाल के बाद भी अलग-अलग कारणों से छात्रों ने आंदोलन किया. कभी कट ऑफ मार्क्स जारी करने की मांग को लेकर तो कभी दूसरी मांगों के लिए. लेकिन ख्यांग्ते के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के दौरान भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच पर गया. दिलीप प्रसाद के कार्यकाल और ख्यांग्ते के कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों में हुए भ्रष्टाचार के तरीकों में थोड़ा बदलाव जरूर आया है.
दिलीप प्रसाद के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के दौरान प्रारंभिक परीक्षा में फेल करने वालों को पास करा दिया गया. सीबीआई जांच के दौरान OMR Sheet मिले. इससे प्रारंभिक परीक्षा में फेल होने वालों को भी मेरिट लिस्ट में शामिल करने के सबूत मिले. सीबीआई जांच के दौरान मुख्य परीक्षा की कुछ कापियां गायब कर दी गयी और सीबीआई को नहीं मिली.
ख्यांग्ते के कार्यकाल में नियुक्तियों के दौरान हुए भ्रष्टाचार के दौरान OMR Sheet में ही बदलाव कर दिया गया. जिन परीक्षार्थियों ने पैसे दिये उन्होंने उतने ही सवालों के जवाब दिया जो उन्हें सही-सही आता था. ऐसे छात्रों ने OMR Sheet के बाकी हिस्से को खाली छोड़ दिया. इसके बाद TDPL और आयोग के कुछ कर्मचारियों ने उन परीक्षार्थियों के OMR Sheet को भरकर उन्हें पास करा दिया. इससे मूल OMR Sheet को देखकर यह पता नहीं लगाया जा सकता है कि फेल परीक्षार्थियों को पास कराया गया है.
गड़बड़ी का पता लगाने के लिए CID ने परीक्षार्थियों से OMR Sheet की कार्बन कॉपी मांगी. इसके बाद कार्बन कॉपी को मूल OMR Sheet से मिलान करने के बाद फेल को पास कराने की पुष्टि की.
आयोग के अध्यक्ष ख्यांग्ते को जनवरी में ही कर्नाटक के सौरभ बर्मन नाम के व्यक्ति ने पत्र लिख कर नियुक्तियों के दौरान भ्रष्टाचार की लिखित शिकायत की थी. इसमें TDPL के कारनामों की विस्तृत जानकारी और 500 OMR Sheet में हेराफेरी करने की जानकारी दी गयी थी. साथ ही अभय कुमार द्वारा पैसा लेकर परीक्षा पास कराने के रेट के अलावा उन लोगों के नाम की भी जानकारी दी थी, जो पैसा देकर परीक्षा पास करना चाहते थे.
इसके अलावा शिव शंकर शर्मा नाम के व्यक्ति ने सीबीआई के निदेशक, रांची के एसएसपी को पत्र लिखकर JPSC में नियुक्तियों के दौरान हो रहे भ्रष्टाचार की जानकारी दी थी. इसमें अभय तिवारी द्वारा पैसा लेकर नियुक्ति कराने की जानकारी दी थी. खुद अभय तिवारी को ही JPSC द्वारा अनेकों परीक्षाओं में पास करने को बतौर उदाहरण पेश किया गया था.
CBI इस शिकायत के मद्देनजर किसी तरह की कार्रवाई करने में असमर्थ थी. क्योंकि राज्य सरकार ने Delhi Police Establishment Act 1946 की धारा-6 के तहत दी गयी आजादी समाप्त कर दी गयी थी. इससे CBI को झारखंड राज्य के क्षेत्र में नया केस करने के पहले राज्य सरकार की अनुमति लेने की बाध्यता हो गयी थी.
चारा घोटाले की जांच के दौरान सरकार ने Delhi Police Establishment Act 1946 की धारा-6 के तहत यह आजादी दी थी कि वह राज्य सरकार के अनुमति के बिना केस करे. लेकिन आयोग के अध्यक्ष और रांची पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की.
जनवरी-फरवरी 2026 में मिली शिकायतों के बाद CID हरकत में आयी. आयोग के कार्यालय पर छापा मारा. अध्यक्ष ने त्यागपत्र दिया. इसके बाद जांच में तेजी आयी. अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अध्यक्ष से भी कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है. अब आयोग के वर्तमान सदस्यों से पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है. रविवार को आयोग के तीनों सदस्यों ने त्यागपत्र दे दिया है.
नोटः कल पढ़ें, नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की चौथी कड़ी- दारोगा नियुक्ति में गड़बड़ी.



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