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झारखंड में नियुक्ति घोटाला 11: सरकार ने पहली बार नियुक्ति घोटाले की बात मानी

Ranchi News: झारखंड गठन के बाद कई नियुक्ति घोटाले हुए. लेकिन वर्तमान सरकार को छोड़ किसी भी सरकार ने नियुक्ति घोटाले की बात स्वीकार नहीं की थी. JPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा, लेक्चरर परीक्षा में सरकार के विरोध के बावजूद CBI जांच हुई थी.
 

Ranchi News: झारखंड गठन के बाद कई नियुक्ति घोटाले हुए. लेकिन वर्तमान सरकार को छोड़ किसी भी सरकार ने नियुक्ति घोटाले की बात स्वीकार नहीं की थी. JPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा, लेक्चरर परीक्षा में सरकार के विरोध के बावजूद CBI जांच हुई थी. लेकिन सरकार ने परीक्षा रद्द नहीं की थी. वर्तमान सरकार ने पहली बार नियुक्ति घोटाले की बात स्वीकार करते हुए JPSC और JSSC परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है. इसमें 1932 लोगों की नौकरी जायेगी.

 

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JSSC द्वारा आयोजित CGL परीक्षा में पेपर लीक होने का आरोप लगाया गया था. इन आरोपों को नजरअंदाज किया गया. JSSC द्वारा रिजल्ट जारी करने के बाद फिर से परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया. इसके लिए सफल घोषित परीक्षार्थियों के रौल नंबर को आधार बनाया गया. सफल घोषित अधिकांश परीक्षार्थियों का रौल नंबर क्रमवार था. इस मामले में सेनेटरी एंड फुड इंस्पेक्टर/ सेनेटरी सुपरवाइजर के रिजल्ट को बतौर उदाहरण पेश किया गया. लेकिन सरकार ने उस वक्त इन दलीलों और उदाहरणों को CID की रिपोर्ट के आधार पर अस्वीकार कर दिया. लेकिन सरकार ने अब CGL परीक्षा में भी गड़बड़ी की बात स्वीकार कर ली है.


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सेनेटरी एंड फुड इंस्पेक्टर/ सेनेटरी सुपरवाइजर का रिजल्ट


राज्य सरकार द्वारा JSSC की CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले से CID की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. क्योंकि CGL परीक्षा 2023 में पेपर लीक के मुद्दे पर छिड़ी कानूनी जंग में CID हाईकोर्ट में यह कह चुकी है कि परीक्षा में पेपर-लीक नहीं हुआ है. CID ने कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में यह कहा था कि पिछली कुछ परीक्षाओं में पूछे गये सवाल-जवाब में से अनुमान के आधार पर कुछ सवाल-जवाब तैयार किये गये थे. इसमें से 66 सवालों के जवाब मूल परीक्षा में पूछे गये जवाब से मिलते हैं. लेकिन जांच के दौरान कहीं भी प्रश्न पत्र नहीं मिला.

 

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CID ने अनुमान के आधार पर तैयार किये गये सवाल-जवाब रट कर सिर्फ 10 लोगों के परीक्षा में सफल होने की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी. कोर्ट ने इसी के आधार पर सिर्फ 10 के रिजल्ट को रोक दिया. साथ ही इनके रिजल्ट के CID जांच के अंतिम परिणाम से प्रभावित होने की शर्त लगा दी. कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार ने इन 10 परीक्षार्थियों को छोड़ CGL परीक्षा में सफल हुए सभी को नियुक्त कर लिया. सरकार द्वारा CGL रद्द करने की घोषणा से उन सभी लोगों की नौकरी समाप्त हो जायेगी जो इस परीक्षा में सफल होने के बाद विभिन्न पदों पर नियुक्त हुए थे. इसमें 1932 लोगों की नौकरी जायेगी.

 

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CGL-2023 की परीक्षा में सफल होने के बाद नौकरी कर रहे लोगों द्वारा सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट जायेंगे. कोर्ट में शुरू होने वाले इस कानूनी जंग में परीक्षा रद्द किये जाने के फैसले को सही साबित करने के लिए राज्य सरकार को कोर्ट में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली होने का सबूत और दलील पेश करना होगा. ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में सरकार का परीक्षा रद्द करने से संबंधित फैसले को निरस्त किये जाने का खतरा बना रहेगा. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, पंजाब, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों मे नियुक्ति प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी से संबंधित मामलों की सुनवाई के बाद पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया. कोर्ट ने अपना फैसला रद्द करने के कारणों का भी उल्लेख किया है. इन कारणों को फिलहाल परीक्षा रद्द करने के आधार माना जाता है.


सुप्रीम कोर्ट में Sachin Kumar VS Delhi Subordinate Service Selection, Tamil Nadu VS Kalaimani के मामले में सुनवाई के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल कर्मचारी चयन आयोग द्वारा की गयी शिक्षकों की नियुक्ति परीक्षा रद्द कर दी थी. इससे 25 हजार कार्यरत शिक्षकों को नौकरी चली गयी थी. सचिन बनाम दिल्ली सब ऑर्डिनेट सर्विस के मामले में न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायाधीश एमआर शाह की पीठ ने बड़े पैमाने पर हुई धांधली के आधार पर परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया था.


तामिलनाडू बनाम कलाइमनी के मामले की सुनवाई न्यायाधीश एल नागेश्वर राव और न्यायाधीश हेमंत गुप्ता की पीठ में हुई थी. नियुक्तियों का यह मामला भी शिक्षकों से संबंधित था. इसमें OMR Sheet  में हेराफेरी की गयी थी. न्यायालय ने इस परीक्षा को रद्द कर दिया था. पश्चिम बंगाल शिक्षक नियुक्ति के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायाधीश संजय कुमार की पीठ में हुई थी. कोर्ट ने परीक्षा को रद्द कर दिया था.


सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द की गयी सभी परीक्षाओं में रद्द करने के दौरान यह कहा गया कि जब किसी गहन और तथ्यात्मक जांच से सिस्टम में गड़बड़ियों (जैसे कि धांधली या धोखाधड़ी) का पता चलता हो, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठता हो, तो उसे पूरी तरह से रद्द कर दिया जाना चाहिए.


इसके साथ ही न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि अगर संभव हो, तो निष्पक्षता और समानता को ध्यान में रखते हुए संदिग्ध और निष्पक्ष उम्मीदवारों को अलग-अलग किया जाना चाहिए. लेकिन अगर गलत और सही उम्मीदवारों की सही-सही पहचान कर उन्हें अलग करना संभव नहीं हो तो परीक्षा रद्द कर दिया जाना चाहिए.

 

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