Ranchi News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सदस्य अनिमा हांसदा ने आयोग का नियम तोड़ा था. उन्होंने अपनी बेटी के आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल होने की जानकारी नहीं दी थी. इसलिए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. हालांकि तत्कालीन सदस्य ने कारण बताओ नोटिस का हास्यास्पद जवाब दिया था.
JPSC द्वारा आयोजित परीक्षा में पारदर्शिता बनाये रखने के लिए कई नियम लागू किये गये हैं. इसके तहत आयोग के सदस्य या किसी अन्य अधिकारी के पारिवारिक सदस्यों के परीक्षा में शामिल होने की जानकारी संबंधित सदस्य या अधिकारी द्वारा दी जानी है. सूचना देने के बाद आयोग के सदस्य या संबंधित अधिकारी द्वारा ख़ुद को परीक्षा से संबंधित काम से अलग कर लेना है. इस नियम का उद्देश्य परीक्षा में भाई-भतीजावाद के आरोपों से बचना और परीक्षा की पवित्रता व पारदर्शित बनाये रखना है.
अब तक आपने पढ़ा...
लेकिन आयोग के सदस्य अनिमा हांसदा ने इस नियम का उल्लंघन किया था. संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 में उनकी बेटी परीक्षा में शामिल हुई थी. लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी आयोग को नहीं दी थी और ना ही परीक्षा प्रक्रिया से ख़ुद को अलग किया था.
अब तक आपने पढ़ा....
आयोग के बाह्य स्रोतों से एक लिखित शिकायत मिली थी. इसमें यह कहा गया था कि JPSC सदस्य अनिमा हांसदा की बेटी, संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुई है. शिकायत मिलने के बाद इस मामले में अनिमा हांसदा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. उन्होंने इस कारण बताओ नोटिस का हास्यस्पद जवाब दिया था.
अब तक आपने पढ़ा....
उन्होंने जवाब में अपनी बेटी के संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने की बात स्वीकार की थी. लेकिन इसकी सूचना आयोग को नहीं देने के कारणों का उल्लेख करते हुए यह लिखा था कि उन्होंने यह सोचा था कि बेटी के PT में पास होने के बाद इससे संबंधित सूचना आयोग को देंगी.
उनके इस हास्यास्पद जवाब पर उनके ख़िलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी थी. क्योंकि उनकी बेटी PT में असफल हो गयी थी. PT में असफल होने की वजह से वह सिविल सेवा की मुख्य लिखित परीक्षा में शामिल नहीं हो सकी थी. इसलिए JPSC सदस्य अनिमा हांसदा को आगे की परीक्षा प्रक्रिया से अलग नहीं किया गया था. उनकी बेटी 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुई थीं या नहीं? इसकी स्पष्ट जानकारी फ़िलहाल उपलब्ध नहीं है.
14वीं सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना के बाद CID ने आयोग में छापा मारा था. छापेमारी के तत्काल बाद आयोग के अध्यक्ष और तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था. राज्यपाल से नाम संबोधित इस्तीफा मुख्यमंत्री कार्यालय में जमा हुआ था. इसके बाद इसे स्वीकृति के लिए राज्यपाल सचिवालय भेजा गया था. जांच के बाद आगे बढ़ने पर CID ने आयोग के तत्कालीन सदस्य एल ख्यांग्ते को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद आयोग के सदस्यों से पूछताछ की. मामले में जांच अभी जारी है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें








