जब युवाओ और बच्चों ने एजुकेशन को बड़ा मुद्दा बना दिया तो सरकारों के लिए यह आउट ऑफ़ सिलेबस विषय हो गया! हिन्दू-मुस्लिम, बाहरी-भीतरी या जातिवाद जैसे मुद्दों पर नारा लगाकर राजनीति करने वाले राजनितिक दलों के सामने अजीब दुविधा की स्थिति पैदा होने लगी है!फिलहाल उनके लिए इजी टारगेट और एग्जिट रूट कोचिंग वाले हैं! उनकी नजर में सिर्फ कोचिंग वाले ही एजुकेशन सिस्टम को करप्ट करने उसे कमर्शियल बनाने वाले हैं!
अब कुछ सवाल
- - क्या कोचिंग वालों ने कहा की पिछले दस सालों में एक लाख सरकारी स्कूल को बंद कर दिया जाए!
- - कौन रोक रहा है सरकारी स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने में? कोचिंग वाले?
- - क्या स्कूल/कॉलेज की पढ़ाई और मेडिकल/इंजीनियरिंग/ सिविल सर्विस/बैंकिंग जैसे नौकरी की परीक्षा का सिलेबस सिंक है? बिलकुल नहीं?
क्यों नहीं ऐसा सिस्टम बनाया जाता है की दोनों की पढ़ाई एक साथ हो! यकीन मानिये अगर आप सिर्फ 12वीं की पढ़ाई ईमानदारी से करते हैं तो कंपटीशन नहीं निकाल पाएंगे! इस गैप को कोचिंग वाले भरते हैं! ये गैप सरकार एजुकेशन सिस्टम में सुधार कर क्यों नहीं भरती है ?
- - तमाम स्कूल/कॉलेज में लाखों टीचर एक्सपर्ट के पद खली है! उन्हें भरने से कौन कोचिंग वाले रोक रहे हैं.
- - बिहार के पटना साइंस कॉलेज में होम साइंस के प्रोफेसर प्रिंसिपल बना दिए जाते हैं! क्या ऐसे एजुकेशन सिस्टम अपग्रेड होगा?
- - क्या देश 99% स्कूल/कॉलेज ऐसे हैं जहां आप पढ़कर इन एग्जाम को निकल पाएंगे? आज कल टीचर को सबसे उपेक्षित नौकरी मान लिया गया है! वे सरकार के "डिलीवरी पर्सन" हो गए हैं! सारा "डिलीवरी" देने के बाद टाइम बचता है तब उन्हें पढ़ाने के लिए भेजा जाता है! क्या इन सबके लिए कोचिंग जिम्मेदार है?
मूल मुद्दा है की सरकार का एजुकेशन सिस्टम ध्वस्त है! उसमे उम्मीद नहीं दिखती है! तब परिवार वाले पूरी कमाई लगाकर कोचिंग की तरफ निवेश करते हैं! ये परिवार वाले बहुत खुशी से कोचिंग में निवेश नहीं करते हैं! और कोचिंग वाले कोई इनके घर आकर जबरन पैसा लेते हैं!
इसीलिए सरकार खुद अपने अंदर झांके! अपना सिस्टम सुधारे! अपनी विफलता कोचिंग वालों पर न दें! कोचिंग उनकी विफलता का प्रोडक्ट है! कारण नहीं है!