देश के युवा संसद को घेरने पहुंचे, वह संसद के चौखट तक पहुंच गये. मोदी सरकार को 12 साल में पहली बार झुकना पड़ा. पहली बार किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ. केंद्र सरकार पहली बार बैकफुट पर है. झारखंड में 10 अगस्त को जेपीएससी नियुक्ति में घोटाले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर छात्र विधानसभा घेरने पहुंचे. उन्हें रोकने के तमाम बंदोबस्त धरे के धरे रह गए, छात्र विधानसभा के गेट पर पहुंच गये. हेमंत सरकार हतप्रभ है. ऐसा ना दिल्ली में पहले कभी हुआ, न झारखंड में.
तो आज का सच क्या है? क्या देश के व राज्यों के हुक्मरान यह समझ चुके हैं, कि जिनके साथ जेनरेशन-जेड (जेन जी) होगा, उसका ही जिंदाबाद होगा. जी हां, यही आज का सच है. देश के 40 करोड़ जेन जी. देश के कुल करीब 92 करोड़ वोटरों का 41 प्रतिशत जेन जी. यानी वह वह जिधर जायेगा, उधर जिंदाबाद हो जायेगा.
सरकारें जेन जी को खुश रखना चाहती है. लेकिन संकट है. सरकारों की मौज, मंत्रियों-अफसरों का भ्रष्टाचार, ठेकेदारों, दलालों व बिचौलियों का साथ. जेन जी को खुश करना है, तो सबको टाईट करना होगा. कोई भी सरकार यह करना नहीं चाहती और जेन जी को खुश करना चाहती है. यह असंभव है.
सत्ता खुद को बदले बिना जेन जी को खुश नहीं कर सकती. क्योंकि यह जेन जी जानता है, उसे हर कदम पर भ्रष्टाचार स्पष्ट नजर आता है. वह किसी राजनीतिक दल का अंधभक्त नहीं है. गलत को गलत कहने की ही नहीं, विरोध में खड़ा होने की साहस है उसमें. उसे पता है कि सरकारें अपनी विलासिता में मग्न है. पैसा देकर वोट खरीद लेती है. जो उसके साथ है, उसकी संपत्ति बढ़ रही है. वह ऐश में है और बाकी सारे लोग हाशिये पर.
इसलिए अगर सरकारें चाहती हैं कि जेन जी उनके पक्ष में रहे, तो सबसे पहले उनके साथ राजनीतिक खेल ना करे. ईमानदारी से उनके लिए नीतियां बनाये. जो अफसर, ठेकेदार, दलाल, बिचौलिया गलत कर रहा है, उसे तत्काल सजा दे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में गड़बड़ी ना हो.
सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जेन जी को अच्छी शिक्षा मिलेगी, आय प्रमाण पत्र-जाति प्रमाण पत्र बनवाने में ना कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे और ना ही रिश्वत देने होंगे. सरकारों को यह तय करना होगा कि कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में सेशन लेट नहीं होगा. पेपर लीक नहीं होगा. पिछले दरवाजे से नियुक्ति नहीं होगी.
जेन जी को नौकरी चाहिए. जॉब चाहिए. कैश नहीं चाहिए. वह काम चाहता है. सरकार को इसकी व्यवस्था करनी होगी. डिग्री उद्योग लगाने के बदले नौकरी का इंतजाम करना होगा. अगर सरकार यह सब नहीं करती है, जो जेन जी उनकी बातों में नहीं आने वाला. वह पहले की पीढ़ी से ना सिर्फ अलग है, बल्कि अकूत सूचनाओं से लैस है. सरकारों के लिए यही संभलने का वक्त है. देखना है कि सरकारें कितनी जल्दी यह समझती है.
