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झारखंड में नियुक्ति घोटाला-8: TDPL ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 में भी जालसाजी की

TDPL ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 में भी जालसाजी की है. 11वीं,12वीं और 13वीं को मिलाकर संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 के लिए जनवरी 2024 में विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. इस परीक्षा के कॉपियों की जांच On Screen Evaluation System से किया गया था. कॉपियों की जांच हो चुकी थी. लेकिन रिजल्ट जारी नहीं हुआ था.
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Ranchi: TDPL ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 में भी जालसाजी की है. 11वीं,12वीं और 13वीं को मिलाकर संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 के लिए जनवरी 2024 में विज्ञापन प्रकाशित किया गया था. इस परीक्षा के कॉपियों की जांच On Screen Evaluation System से किया गया था. कॉपियों की जांच हो चुकी थी. लेकिन रिजल्ट जारी नहीं हुआ था. एल ख्यांग्ते के अध्यक्ष बनने के बाद TDPL ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा का रिजल्ट तैयार किया. इसमें भारी गड़बड़ी की गयी. जिसकी वजह से कई अफसरों के पारिवारिक सदस्य अफसर बन गये.

 

राज्य सेवा के कुल 342 पदों के लिए संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 आयोजित की गयी थी. इस परीक्षा में पारदर्शिता बनाये रखने के लिए लखनऊ में आयोजित कॉन्फ्रेंस में दिये गये सुझावों को अमली जामा पहनाने की कोशिश की गयी थी. लेकिन JPSC में आवश्यक संसाधनों की कमी की वजह से इसे पूरी तरह अपनाया नहीं जा सका था. लखनऊ में आयोजित कॉन्फ्रेंस में कॉपियों की जांच के लिए Online Screen Evaluation System अपनाने का सुझाव दिया गया था. कॉन्फ्रेंस से लौटने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष निलीमा केरकेट्टा ने आयोग की एक टीम को Online Screen Evaluation System के ट्रेनिंग के लिए लखनऊ गयी थी.

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ट्रेनिंग से टीम के लौटने के बाद समीक्षा के दौरान Online Screen Evaluation System को लागू करने के लिए आयोग में संसाधनों की कमी पायी गयी. इसलिए Online Screen Evaluation System के बदले On Screen Evaluation System अपनाया गया. On Screen Evaluation System में कॉपियों के कोडिंग के बाद Scan कॉपी के Randomisation के बाद उसे मूल्यांकन के लिए नियुक्त किये गये प्रोफेसर को Online भेजा था. मूल्यांकन के बाद इसे आयोग को Online से ही वापस करना था. संसाधनों की कमी से लागू किये गये On Screen Evaluation System में मूल्यांकन के लिए नियुक्त प्रोफेसर को रांची बुलाया गया. इसके बाद Scan कॉपी उनके कंप्यूटर पर उपलब्ध कराया गया.


संयुक्त सिविल सेवा 2023 में कॉपियों का मूल्यांकन On Screen Evaluation System से किया गया. लेकिन रिजल्ट नहीं निकला. इसकी वजह क्षेत्रीय एवं जनजातिय भाषा के कॉपियों का मूल्यांकन प्रोफेसर के बदले घंटी आधारित शिक्षकों से कराने पर विवाद पैदा करना था. राज्य में क्षेत्रीय एवं जनजातिय भाषा की पढ़ाई के लिए सरकार ने घंटी आधारित शिक्षक ही नियुक्त थे. 

 

झारखंड के अलावा दूसरे किसी राज्य में नागपुरिया, खोरठा सहित झारखंड की अन्य जनजातीय भाषों की पढ़ाई ही नहीं होती है. इसलिए दूसरे राज्य से क्षेत्रीय जनजातीय भाषा के कॉपियों की जांच के लिए किसी प्रोफेसर को बुलाया जाना संभव नहीं था. आयोग ने रांची विश्वविद्यालय द्वारा उलब्ध कराये गये क्षेत्रीय एवं जनजातिय भाषाओं के शिक्षकों से ही संबंधित भाषा की कॉपियों का मूल्यांकन कराया.

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इस विवाद के दौरान ही आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष निलीमा केरकेट्टा का कार्यकाल 21 अगस्त 2024 को समाप्त हो गया. मुख्य सचिव के पद से रिटायर होने के बाद एल ख्यांग्ते को फरवरी 2025 में आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. उन्होंने योगदान करने के बाद परीक्षा का पूरा काम TDPL को दे दिया. इसके बाद TDPL ने संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 का काम शुरू किया. TDPL द्वारा रिजल्ट को अंतिम रूप देने के क्रम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गयी. इसमें कई मेधावी छात्र फेल हो गये. रिजल्ट में की गयी जालसाजी की वजह से कई आयोग्य लोग अफसर बन गये. 


चर्चा है कि राज्य में कार्यरत एक अधिकारी के पारिवारिक सदस्य भी इसी गड़बड़ी में अफसर बना दिये गये. संबंधित अधिकारी के बेटी का चुनाव राज्य प्रशासनिक सेवा में हुआ. बेटे को दूसरी सेवा में पास करा दिया गया. संबंधित अधिकारी का बेटा 14 वीं सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुआ. वह PT में सफल हो गया है. इस बीच फेल हुए कई मेधावी छात्रों ने सूचना अधिकार अधिनियम का इस्तेमाल करते हुए हर विषय में मिले अपने नंबर की जानकारी मांगी. लेकिन उसे जानकारी नहीं दी गयी. मामला हाईकोर्ट पहुंचा. 


कोर्ट ने सूचना अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत सबजेक्ट वाइज नंबर की जानकारी देने का निर्देश दिया. लेकिन आयोग ने नहीं दी. कुछ परीक्षार्थियों ने अपनी कॉपी देखने की मांग की. आयोग द्वारा कॉपी दिखाने से इनकार करने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. हाईकोर्ट में JPSC ने कॉपी दिखाने का वायदा दिया. कोर्ट ने चार सप्ताह में कॉपी दिखाने का आदेश दिया. लेकिन JPSC ने कॉपी नहीं दिखायी.

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