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झारखंड में बच्चों को न्याय दिलाने वाले आयोग में पिछले तीन सालों से लटका है ताला

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Shruti prakash singh Ranchi : झारखंड में बच्चों को न्याय दिलाने वाली संस्था आज खुल को बेसहारा समझ रही है. क्यों कि झारखंड बाल संरक्षण आयोग में पिछले तीन सालों से अध्यक्ष समेत सभी पद खाली पड़े हुए है. बता दें कि अप्रैल 2019 में ही आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया है. जिसके बाद से इस ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है. ऐसे में बच्चों के अधिकार और उनकी सुरक्षा को लेकर सरकार के रवैये पर सवाल उठने लगे हैं. ( रांची">https://lagatar.in/category/jharkhand/south-chotanagpur-division/ranchi/">रांची

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आयोग में पिछले तीन साल से लटका है ताला

झारखंड बाल संरक्षण आयोग में एक अध्यक्ष सहित कुल सात पद स्वीकृत हैं. जिनमें पिछले तीन सालों से अध्यक्ष सहित तीन सदस्य ही काम कर रहे थे. बाकी के तीन पद खाली पड़े हुए थे. इन तीनों सदस्यों का कार्यकाल 20 अप्रैल 2019 को समाप्त हो गया है. जबकि अध्यक्ष कार्यकाल 22 अप्रैल 2019 को पूरा हो चुका है.  जिसके बाद से बाल संरक्षण आयोग के सभी पद खाली पड़े हुए है. गौरतलब है कि बाल संरक्षण आयोग के कार्यकाल समाप्त होने से पूर्व ही आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष आरती कुजूर ने सरकार को पत्र भेजकर आयोग के पुनर्गठन के लिए कार्यकाल को एक्सटेंशन देने का अनुरोध किया था. लेकिन एक्सटेंशन नहीं मिल पाया. जिससे आयोग में पिछले तीन सालों से ताला लटका है. इसे भी पढ़ें - सोनाक्षी">https://lagatar.in/sonakshi-sinha-got-engaged-shared-a-picture-flaunting-the-ring-in-insta/">सोनाक्षी

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बच्चों से जुड़े आपराधिक और गैर आपराधिक मामलों की सुनवाई भी बंद  

बाल संरक्षण आयोग में सभी पद खाली हो जाने से बच्चों से जुड़े कई मामलों की सुनवाई बंद है. राज्य के लगभग 56 लाख बच्चों की इस प्रतिनिधि संस्था के निष्क्रिय पड़ जाने से स्कूलों की मॉनिटरिंग, बच्चों से जुड़े आपराधिक और गैर आपराधिक मामलों की सुनवाई भी बंद है. इसे भी पढ़ें - BIG">https://lagatar.in/big-breaking-ed-sent-notice-to-ias-pooja-singhal-to-be-questioned-from-tomorrow/">BIG

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जानिए क्या है बाल संरक्षण आयोग का दायित्व

झारखंड में बाल संरक्षण आयोग का गठन 18 जून 2012 को हुआ है. जिसमें 18 वर्ष तक के बच्चों को संवैधानिक अधिकार मुहैया कराया गया है. आयोग को राष्ट्रीय स्तर पर तय होने वाली बाल संरक्षण से संबद्ध नीतियों, संचालित कार्यक्रमों और इससे संबद्ध प्रशासनिक गतिविधियों पर सीधे हस्तक्षेप की शक्ति प्रदान की गयी है. व्यवहार न्यायालय की ही तरह बच्चों के अधिकार से जुड़े मामलों की सुनवाई भी बाल संरक्षण आयोग कर सकता है. इसे भी पढ़ें - IAS">https://lagatar.in/ias-pooja-singhal-case-the-interrogation-of-husband-abhishek-jha-continues-for-the-second-day-as-well/">IAS

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