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झारखंड में IPS से लेकर सिपाहियों तक के स्वीकृत पदों की संख्या में ढाई गुना बढ़ोतरी

Ranchi :  झारखंड में पिछले 24 वर्षों के दौरान पुलिस बल के ढांचे में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है.राज्य गठन (2000) के बाद से अब तक आईपीएस अधिकारियों से लेकर सिपाहियों तक के स्वीकृत पदों में करीब ढाई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

 

 

आईपीएस अधिकारियों की संख्या में भी हुआ इजाफा

साल 2001 में झारखंड पुलिस में कुल 27,739 अधिकारी व कर्मचारी थे. इसमें आईपीएस, डीएसपी, इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर, एएसआई और सिपाही शामिल थे. वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 65,742 हो चुकी है. साल 2001 में झारखंड में 81 आईपीएस अधिकारियों के पद स्वीकृत थे, जो अब बढ़कर 158 हो गए हैं. इसी तरह डीएसपी से लेकर सिपाही तक के पद 27,658 से बढ़कर 65,584 हो गए हैं. 

 

जनसंख्या बढ़ी पर थानों की संख्या नहीं

झारखंड की आबादी बढ़ रही है. लेकिन पुलिस स्टेशन की संख्या में इजाफा नहीं हो रहा है.  इसके चलते आज झारखंड में एक पुलिस थाना औसतन एक लाख से अधिक लोगों की सुरक्षा का जिम्मा निभा रहा है, जो कि राष्ट्रीय औसत (75,000 प्रति थाना) से काफी अधिक है.  वर्तमान में झारखंड के शहरी इलाके में 1.07 लाख और ग्रामीण इलाके में 87.75 हजार की आबादी पर एक थाना है. पूरे राज्य में फिलहाल 606 पुलिस थाना है. जबकि राष्ट्रीय स्तर पर औसतन 75 हजार की आबादी पर एक थाना होता है

 

बिहार से थोड़ी बेहतर स्थिति में झारखंड

झारखंड के पड़ोसी राज्य बिहार की बात करें तो यहां की स्थिति झारखंड से थोड़ी खराब है, यहां शहरी क्षेत्रों में 76.29 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में 1.64 लाख लोगों की आबादी पर एक थाना है.

 

पुलिसकर्मियों की भारी कमी

संख्याबल के लिहाज से झारखंड में पुलिस बल की भारी कमी है, जो एक गंभीर मुद्दा है. वर्तमान में राज्य में 908 लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी के कंधों पर है. 

 

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