Ranchi : झारखंड के गिरिडीह में आज सोमवार की सुबह पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत हो गयी. पुलिस हिरासत में मौत का यह पहला मामला नहीं है. साल 2019 से अब तक राज्य के अलग-अलग थाने में आठ लोगों की पुलिस हिरासत में मौत हो चुकी है. इस तरह झारखंड में हर छठे माह पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति की मौत हो रही है. (पढ़ें, मनी">https://lagatar.in/money-laundering-case-ed-files-prosecution-complaint-against-ca-neeraj-mittal-ram-prakash-tara-chand/">मनी
लॉन्ड्रिंग केस: CA नीरज मित्तल, राम प्रकाश व तारा चंद के खिलाफ ED ने दाखिल की प्रोसिक्यूशन कंप्लेन)
: भालू के हमले से अधेड़ घायल, रांची रिम्स रेफर
लॉन्ड्रिंग केस: CA नीरज मित्तल, राम प्रकाश व तारा चंद के खिलाफ ED ने दाखिल की प्रोसिक्यूशन कंप्लेन)
हिरासत में मौत होने का मतलब क्या है?
पुलिस हिरासत में किसी अभियुक्त की मौत को ‘हिरासत में मौत’ का मामला माना जाता है. चाहे अभियुक्त रिमांड पर हो या ना हो, हिरासत में लिया गया हो या पूछताछ के लिए बुलाया गया हो, उस पर कोई मामला अदालत में लंबित हो या वह सुनवाई की प्रतीक्षा कर रहा हो. इस दौरान अभियुक्त की मौत हो तो उसे ‘हिरासत में मौत’ माना जाता है. इसमें पुलिस हिरासत के दौरान आत्महत्या, बीमारी के कारण हुई मौत, हिरासत में लिये जाने के दौरान घायल होने एवं इलाज के दौरान मौत या अपराध कबूल करवाने के लिए पूछताछ के दौरान पिटाई से हुई मौत शामिल है.पुलिस हिरासत में मौत की होती है सीआईडी जांच
झारखंड में पुलिस हिरासत में मौत के सभी मामलों की जांच सीआइडी करती है. वर्तमान में भी पुलिस हिरासत में मौत के सभी मामलों की जांच सीआईडी कर रही है. इनमें से कुछ मामलों में पुलिस कर्मियों को दोषी पाते हुए विभागीय कार्रवाई की जा रही है. इसे भी पढ़ें : लातेहार">https://lagatar.in/latehar-bear-attacked-the-person-who-went-to-find-buffalo-in-the-forest/">लातेहार: भालू के हमले से अधेड़ घायल, रांची रिम्स रेफर
Leave a Comment