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संजय सेठ के सवालों पर रेल मंत्रालय का जवाब- वंदे भारत ट्रेनें स्वदेशी, तेज व सुरक्षित

राज्यसभा में रक्षा राज्य मंत्री ने वंदे भारत ट्रेनों को लेकर रेल मंत्री से चार अहम सवाल पूछे थे.
 

Ranchi : राज्यसभा में रक्षा राज्य मंत्री ने वंदे भारत ट्रेनों को लेकर रेल मंत्री से चार अहम सवाल पूछे थे.

 

सवाल इस प्रकार है-

1. क्या सरकार मेक इन इंडिया के तहत वंदे भारत ट्रेनों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दे रही है?

2. वर्तमान में कितने रूटों पर अर्ध-उच्च गति (सेमी हाई स्पीड) वाली वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं और भविष्य में इनके विस्तार की क्या योजना है?

3. वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क को किस तरह बेहतर बना रही हैं?

4. ऐसी आधुनिक रेल अवसंरचना शुरू होने से रोजगार, सप्लाई चेन और पर्यटन को क्या लाभ मिल रहे हैं?

 

इन सवालों के जवाब में रेल मंत्रालय ने वंदे भारत ट्रेनों की स्वदेशी निर्माण प्रक्रिया, विस्तार योजना, यात्री सुविधाओं और इसके आर्थिक लाभों की जानकारी दी.

 

रेल मंत्रालय ने बताया कि वंदे भारत ट्रेनें पूरी तरह भारत में ही बनाई जा रही हैं. नवंबर 2025 तक भारतीय रेल की उत्पादन इकाइयों ने 94 वंदे भारत चेयरकार ट्रेनें तैयार कर ली हैं. लंबी दूरी के यात्रियों के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का नया डिजाइन भी तैयार किया गया है, जिसकी. कुछ ट्रेनें अभी परीक्षण और कमीशनिंग के चरण में हैं.

 

फिलहाल देशभर में 164 वंदे भारत ट्रेन सेवाएं चल रही हैं. ये ट्रेनें दिल्ली, वाराणसी, जम्मू, कटरा, श्रीनगर, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, नागपुर, पटना, गया, हावड़ा समेत कई प्रमुख शहरों और धार्मिक-पर्यटन स्थलों को जोड़ रही हैं. आगे नई वंदे भारत ट्रेनें शुरू करने की योजना है, जो ट्रैक क्षमता और रूट की उपलब्धता पर निर्भर करेगी.

 

साथ ही सुविधाओं की बात करें तो यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए वंदे भारत ट्रेनों में आधुनिक सुविधाएं जैसे मजबूत कोच, ऑटोमैटिक दरवाजे, आपातकालीन अलार्म, बेहतर अग्नि सुरक्षा, सभी कोचों में सीसीटीवी, आरामदायक सीटें, दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष शौचालय और केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली शामिल हैं. इन ट्रेनों को 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया गया है.

 

रेल मंत्रालय ने यह भी कहा कि वंदे भारत ट्रेनों के स्वदेशी निर्माण से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं. कोच निर्माण, पुर्जों की आपूर्ति, रखरखाव और तकनीकी सेवाओं में काम बढ़ा है. आयात पर निर्भरता कम हुई है और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिली है. साथ ही, बेहतर और तेज रेल संपर्क से पर्यटन, उद्योग और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिला है.

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