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सदन में अरूप चटर्जी ने उठाई बांग्ला अकादमी की मांग, एके राय को सम्मान देने की बात

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक अरूप चटर्जी ने कटौती प्रस्ताव के विरोध में बोलते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए. उन्होंने बांग्ला भाषा की उपेक्षा, विकास कार्यों में फंड के उपयोग और झारखंड आंदोलन के नेताओं के सम्मान से जुड़े विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया.
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Ranchi : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक अरूप चटर्जी ने कटौती प्रस्ताव के विरोध में बोलते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए. उन्होंने बांग्ला भाषा की उपेक्षा, विकास कार्यों में फंड के उपयोग और झारखंड आंदोलन के नेताओं के सम्मान से जुड़े विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया.

 

अरूप चटर्जी ने कहा कि एकीकृत बिहार के समय से वहां बांग्ला अकादमी काम कर रही है, लेकिन झारखंड बनने के इतने साल बाद भी राज्य में बांग्ला अकादमी का गठन नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि झारखंड की बड़ी आबादी बांग्ला भाषा बोलती है.

 

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जमशेदपुर, संथाल परगना और छोटा नागपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग बांग्ला भाषा का उपयोग करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कई इलाकों में कुर्मी और संताली समाज के लोग भी बांग्ला बोलते हैं.

 

विधायक ने स्कूलों में बांग्ला भाषा की किताबों की कमी और बांग्ला शिक्षकों की बहाली नहीं होने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की मांग की.

 

अरूप चटर्जी ने झारखंड आंदोलन के नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य निर्माण में कॉमरेड ए.के. राय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि उनके निधन के बाद अब तक न तो उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है और न ही किसी संस्थान का नाम उनके नाम पर रखा गया है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ए.के. राय के सम्मान में प्रतिमा स्थापना और किसी संस्थान का नामकरण किया जाए.

 

उन्होंने योजना एवं विकास विभाग से जुड़े अनटाइड फंड के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि नए नियमों के कारण अब सरकारी कार्यालयों, थानों और ब्लॉक की बाउंड्री जैसे कार्यों में इस राशि का उपयोग नहीं किया जा सकता, जिससे कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं.

 

इसके अलावा उन्होंने राज्य में सरकारी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण और कब्जे पर चिंता जताई. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार एडवोकेट जनरल के माध्यम से अदालत के साथ समन्वय बनाकर सरकारी जमीनों को वापस लेने की दिशा में कदम उठाए.

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