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भारत–श्रीलंका शैक्षणिक सहयोग को मजबूती, CUJ रांची के उपेंद्र बने शोध सह-निर्देशक

श्रीलंका केलानिया विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ ग्रैजुएट स्टडीज ने सीयूजे रांची के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. उपेन्द्र कुमार सत्यार्थी को शोध सह-निर्देशक नियुक्त किया है.
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Ranchi : श्रीलंका केलानिया विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ ग्रैजुएट स्टडीज ने सीयूजे रांची के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. उपेन्द्र कुमार सत्यार्थी को शोध सह-निर्देशक नियुक्त किया है. यह नियुक्ति भारत और श्रीलंका के बीच शैक्षणिक, भाषायी एवं साहित्यिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

 

डॉ. उपेन्द्र कुमार सत्यार्थी, केलानिया विश्वविद्यालय के हिंदी अध्ययन विभाग की शोधार्थी आरएम पी.एस. रत्नायक के शोध विषय “प्रेमचंद की कहानी कला और संवेदना” का सह-निर्देशन करेंगे. इस शोध के अंतर्गत प्रेमचंद की कथा-शैली, सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना तथा उनकी कहानियों में निहित युगबोध का समग्र एवं आलोचनात्मक विश्लेषण किया जाएगा.

 

इस उपलब्धि पर झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास, कुलसचिव केके राव, निदेशक आईक्यूएसी प्रो. आरके डे, डीन-अकादमिक प्रो. अरुण कुमार पाढ़ी, डीन अनुसंधान एवं विकास प्रो. मनोज कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. बीबी मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं शिक्षकों ने हर्ष व्यक्त किया.

 

कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास ने कहा कि डॉ. उपेन्द्र कुमार सत्यार्थी का केलानिया विश्वविद्यालय में शोध सह-निर्देशक के रूप में चयन विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है. यह हमारे शिक्षकों की अकादमिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाता है तथा भारत-श्रीलंका के बीच शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देगा.

 

हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रत्नेश विश्वकसेन ने कहा कि डॉ. सत्यार्थी हिंदी और सिंहली साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन के क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा तथा विभाग की अकादमिक प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेगा.

 

उल्लेखनीय है कि डॉ. उपेन्द्र कुमार सत्यार्थी हिंदी और सिंहली भाषा के प्रमुख साहित्यकारों के तुलनात्मक अध्ययन में निरंतर सक्रिय रहे हैं. उन्होंने भारत और श्रीलंका के साहित्यिक संबंधों को अकादमिक स्तर पर मजबूती प्रदान की है.

 

इसके साथ ही वे श्रीलंका के कई विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा, साहित्य और तुलनात्मक साहित्य पर व्याख्यान दे चुके हैं, जिससे वहां के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच हिंदी साहित्य के प्रति रुचि और समझ का विस्तार हुआ है.

 

विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने इस उपलब्धि को झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय और भारतीय हिंदी साहित्य के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि यह अकादमिक सहयोग भविष्य में दोनों देशों के बीच साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा.

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