Ranchi : कचहरी रोड स्थित तीन मंजिला आरआईटी बिल्डिंग जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है, बावजूद इसके भवन के भीतर दर्जनों कार्यालय और दुकानें संचालित की जा रही हैं.

यह बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रही है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. आरआईटी बिल्डिंग में कुल 42 कमरे हैं. ग्राउंड फ्लोर पर कृषि से संबंधित कई दुकानें संचालित हो रही हैं, जबकि दूसरे फ्लोर पर विभिन्न संगठनों और कार्यालयों का संचालन किया जा रहा है.
तीसरा फ्लोर पूरी तरह खाली पड़ा है. भवन की छत, खिड़कियां और छज्जों में गहरी दरारें आ चुकी हैं. कई स्थानों से छज्जा टूटकर गिर रहा है और छड़ बाहर दिख रहा है, जिससे यहां काम कर रहे लोगों की जान पर हर समय खतरा बना हुआ है.
बरसात में और बढ़ जाता है खतरा
स्थानीय संगठनों के अनुसार, बरसात के मौसम में छत से लगातार पानी टपकता है. भवन की हालत खराब हो चुकी है किसी भी समय हादसा हो सकता है. इसके बावजूद न तो भवन को खाली कराया गया है और न ही सुरक्षा के कोई वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं.
1965-66 में हुआ था निर्माण
केंद्रीय सरना समिति के सदस्यों ने बताया कि यह भवन बिहार सरकार के कार्यकाल में वर्ष 1965-66 में बनाया गया था. तत्कालीन कार्तिक उरांव के कार्यकाल में भवन का निर्माण हुआ था. और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था. प्रारंभ में यहां विशेष शाखा का कार्यालय संचालित होता था, लेकिन समय के साथ भवन की देखरेख पूरी तरह उपेक्षित हो गई.
आरआरडीए ने नहीं किया देखभाल
दुकानदार कल्याण महासंघ के अध्यक्ष आनंद कोठारी ने बताया कि यह भवन कृषि से संबंधित गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. यहां से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों की कृषि मंडियों में वस्तुएं भेजी जाती हैं.
भवन आरआरडीए के अंतर्गत आता है, लेकिन लंबे समय से इसकी नियमित सफाई, मरम्मत और मूलभूत सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है. भवन में वर्तमान में 28 कार्यालय खाली पड़े हैं.
न तो यहां शुद्ध पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौचालय की उचित सुविधा दी गई है. सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है. दुकानदार संघ अपने स्तर पर समय-समय पर मरम्मत कराता रहा है, लेकिन आरआरडीए की उदासीनता के कारण भवन को नुकसान पहुंच रहा है.
आरआईटी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर- आरआरडीए
आरआरडीए से मिली जानकारी के अनुसार, आरआईटी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर घोषित की जा चुकी है और इससे संबंधित मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है. भवन पर फिलहाल स्टे लगा हुआ है, जिसके कारण किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है.
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