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भारत की 7.4 लाख करोड़ की ग्रीन इंडस्ट्री पाइपलाइन फंडिंग संकट में फंसी : रिपोर्ट

छह माह में सिर्फ एक को मिला निवेश

NewDelhi :  भारत में 89 बिलियन डॉलर (करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये) की स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाएं वित्तपोषण संकट से जूझ रही हैं. मिशन पॉसिबल पार्टनरशिप (MPP) और इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन एक्सेलेरेटर द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते छह महीनों में केवल एक परियोजना ही अंतिम निवेश निर्णय (Final Investment Decision, FID) तक पहुंच पाई है. भारत में ग्रीन अमोनिया, हरित हाइड्रोजन और सतत विमानन ईंधन (SAF) जैसी 41 स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा की जा चुकी हैं, लेकिन घोषणाओं को परिचालन सुविधाओं में बदलने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. 

 

भारत निवेश के मामले में चीन और अमेरिका से काफी पीछे

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्वच्छ उद्योग परियोजनाओं ने अब तक 13 बिलियन डॉलर का प्रतिबद्ध निवेश हासिल किया है, जो चीन के 61 बिलियन डॉलर और संयुक्त राज्य अमेरिका के 54 बिलियन डॉलर से बहुत कम है. MPP के CEO फॉस्टीन डेलासेल ने कहा कि भारत में स्वच्छ वस्तुओं के लिए बाजार का धीमा विकास निवेश में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभर रहा है. इसके अलावा, पूंजी की ऊंची लागत भी उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में निवेश को कठिन बना रही है. कहा कि हमें चाहिए कि स्वच्छ उद्योग के विकास के लिए विकास और निजी वित्त संस्थानों की इच्छाशक्ति को सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें. 

 

69 देशों में 826 परियोजनाएं, लेकिन 692 को अभी भी निवेश का इंतजार

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में लगभग 1.6 ट्रिलियन डॉलर की स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन इनमें से अधिकांश को अब तक वित्तपोषण नहीं मिला है. 69 देशों में 826 वाणिज्यिक पैमाने की परियोजनाओं में से 692 को अभी निवेश की आवश्यकता है. वर्तमान स्थिति को गंभीर बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल केवल 15 से कम परियोजनाएं ही अंतिम निवेश निर्णय तक पहुंच रही हैं, जिससे जलवायु, आर्थिक और सामाजिक लाभों में देरी हो रही है. 

 

नीतिगत अनिश्चितता भी बड़ी बाधा

रिपोर्ट में नीति अनिश्चितताओं को भी भारत और अन्य विकासशील देशों में परियोजनाओं की प्रगति में एक बड़ी रुकावट बताया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक स्पष्ट, स्थिर और दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा नहीं होगा, तब तक निजी और सार्वजनिक दोनों तरह के निवेशक पीछे हटते रहेंगे. भारत जैसे विकासशील देशों के लिए स्वच्छ औद्योगिक संक्रमण न केवल जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति का जरिया है, बल्कि रोजगार सृजन और तकनीकी नवाचार का भी अवसर है. लेकिन यदि फंडिंग, नीतिगत स्पष्टता और बाजार निर्माण जैसे मूलभूत अवरोध दूर नहीं किए गए, तो यह संभावना एक अधूरी घोषणा बनकर ही रह जाएगी. 

 

स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं के बारे में  : 

  • कुल घोषित भारतीय परियोजनाएं :  41
  • अनुमानित लागत  :  89 अरब डॉलर
  • अब तक हुआ निवेश :   13 अरब डॉलर
  • चीन में निवेश :   61 अरब डॉलर
  • अमेरिका में निवेश :   54 अरब डॉलर
  • वैश्विक घोषित परियोजनाएं :   826
  • जिन्हें अब तक निवेश नहीं मिला :    692

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