- मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की व ऑस्ट्रेलियाई एग्रीकल्चरल काउंसलर के बीच हुई अहम बैठक
Ranchi: झारखंड में पशुपालन के क्षेत्र को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की की ऑस्ट्रेलियाई एग्रीकल्चरल काउंसलर किरण करामिल के साथ विस्तृत बैठक हुई. इस बैठक में पशुपालन के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की उन्नत तकनीक को झारखंड में अपनाने, विशेषकर नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने को लेकर गंभीर चर्चा की गई.
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि पशुपालन के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की तकनीक विश्व स्तर पर सफल और प्रभावी मानी जाती है. झारखंड सरकार इन तकनीकों को अपनाकर राज्य के किसानों और पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए गंभीर है.
उन्होंने बताया कि नस्ल सुधार के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया के प्रयोगों को झारखंड में लागू किए जाने से विशेष रूप से गौ-पालकों की आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि संभव हो सकेगी.
बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलिया सरकार या वहां के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ एमओयू (MOU) किए जाने की संभावना पर भी चर्चा हुई. इससे दोनों देशों के बीच पशुपालन तकनीक, प्रशिक्षण और अनुभवों का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा.
गौरतलब है कि इस दिशा में 16 दिसंबर को ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन के साथ भी बैठक हुई थी. मंगलवार को हुई यह बैठक उसी चर्चा की अगली कड़ी थी, जिसमें अब व्यवहारिक पहलुओं और भविष्य की कार्य योजना पर विस्तार से विचार किया गया.
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि पशुपालन के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलियाई तकनीक को अपनाने को लेकर अब तक हुई सकारात्मक चर्चाओं से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी अवगत कराया जाएगा. आवश्यकता पड़ने पर विभागीय अधिकारियों के साथ ऑस्ट्रेलिया का अध्ययन दौरा भी प्रस्तावित किया जा सकता है, ताकि वहां की तकनीक और व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके.
ऑस्ट्रेलियाई एग्रीकल्चरल काउंसलर किरण करामिल ने भी बैठक के बाद संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड के साथ हुई चर्चा सकारात्मक रही है और भविष्य में मिलकर इस दिशा में कार्य करने की व्यापक संभावनाएं हैं.
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