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21.65 करोड़ गबन मामले की जांच पूरी, अभियुक्तों को सजा बिंदुओं पर जल्द होगी सुनवाई

Ranchi : गुमला व पलामू में 21.65 करोड़ गबन मामले की सीआईडी जांच पूरी हो चुकी है. इस मामले में गिरफ्तार हुए अभियुक्तों की सजा के बिंदुओं पर जल्द ही सुनवाई होगी. सीआईडी के तत्कालीन एडीजी अनिल पालटा ने 13 मई 2020 को पलामू के विशेष भू-अर्जन उत्तरी कोयल परियोजना मेदनीनगर से 12.60 करोड़ के गबन और गुमला में समेकित जनजाति विकास अभिकरण के 9.05 करोड़ के गबन के मामले में जांच को टेकओवर किया था. इसे भी पढ़ें - पारसनाथ">https://lagatar.in/jains-looted-the-land-around-parasnath-with-the-connivance-of-officers-and-politicians-laxmi-narayan-munda/">पारसनाथ

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forged RTGS application form के माध्यम से फर्जी निकासी की गयी थी

करोड़ों के गबन मामले के मुख्य अभियुक्त निर्भय कुमार उर्फ विवेक सिंह को सीआईडी ने बिहार के जमुई जिले के खैरमा गांव से गिरफ्तार किया था. आरोप है कि निर्भय कुमार ने अपराधियों की मिलीभगत से एसबीआई गुमला के आईटीडीए सरकारी खाते से 27 सितंबर 2019 को फर्जी चेक के माध्यम से 9.16 करोड़ और भू अर्जन कार्यालय पलामू के डाल्टनगंज एसबीआई खाते से 12.60 करोड़ रुपए की सरकारी राशि की अवैध निकासी की थी. जिन फर्जी चेक और forged RTGS application form के माध्यम से फर्जी निकासी की गयी थी, वह गिरफ्तार अभियुक्त निर्भय के द्वारा लिखा और तैयार किया गया था. निर्भय ने अपने बयान में इसे स्वीकार किया था. इस मामले में अन्य अभियुक्तों को सीआईडी पहले भी गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी थी. जिनमें साजन उर्फ मनीष, गणेश लोहरा, पंकज तिग्गा, मो. इकबाल अंसारी, मनीष पांडेय और राजकुमार तिवारी शामिल हैं.

गुमला में फर्जी चेक के माध्यम से हुई थी 9.05 करोड़ की निकासी

समेकित जनजाति विकास अभिकरण, गुमला के अपर परियोजना निदेशक ने 10 अक्टूबर 2019 को गुमला थाना में कांड संख्या 324 /19 में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि समेकित जनजाति विकास अभिकरण, गुमला के खाता से एसबीआइ गुमला से जारी चेक पर फर्जी तरीके से 9.05 करोड़ रुपये ओडिशा में एक्सिस बैंक के कोटपाद शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया. एक ही व्यक्ति ने दो फर्जी हस्ताक्षर से इस राशि की निकासी की है. यह गलत ढंग से एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया है. दर्ज प्राथमिकी में एसबीआइ की गुमला शाखा में कार्यरत संबंधित कर्मी-पदाधिकारी को आरोपित किया गया था.

पलामू में भू-अर्जन विभाग में 12.60 करोड़ का हुआ था घोटाला

पलामू के विशेष भू-अर्जन कार्यालय में पिछले साल 12.60 करोड़ का घोटाला हुआ था. इसमें भू-अर्जन विभाग का नाजिर जेल भेजा गया था. इस पूरे प्रकरण में नाजिर रमाशकर सिंह उर्फ रविशंकर, तत्कालीन विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी बंका राम, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की कचहरी शाखा के पूर्व मुख्य प्रबंधक, फर्जी संस्थान शीतल कंस्ट्रक्शन व फर्जी निकासी करने वाले चंदूलाल पटेल समेत 7 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. पलामू के शहर थाना में 25 अक्टूबर 2019 को कांड संख्या 378/19 के सभी अभियुक्तों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में विशेष भू-अर्जन विभाग के नाम से एसबीआइ में संचालित खाते के चेक से शीतल कंस्ट्रक्शन ने एक बार में 4 करोड़ 20 लाख की निकासी की थी. संबंधित विभाग के खाते के चेक से चंदूलाल पटेल ने 8 करोड़ 40 लाख की दूसरी फर्जी निकासी की. इस तरह एक दिन में कुल 12 करोड़ 60 लाख की अवैध निकासी की गयी थी. जांच में पाया गया था कि बैंक के फर्जी चेक पर विशेष भू-अर्जन अधिकारी ने राशि निकाली थी. इसे भी पढ़ें - BREAKING">https://lagatar.in/breaking-horrific-road-accident-in-seraikela-7-laborers-killed-8-injured-after-pickup-van-overturned/">BREAKING

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