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IPRD में कॉन्ट्रैक्ट पर बहाल 130 कर्मियों को 6 महीने से नहीं मिली सैलरी

  • पहले पदाधिकारियों ने लटकाया, अब सेक्रेटरी के पास पड़ी है फाइल
  • पैसे खत्म होने पर कई APRO, कंप्यूटर ऑपरेटर ने ऑफिस आना किया बंद

Satya Sharan Mishra

Ranchi: कभी जिनकी सैलरी के लिए हेमंत सोरेन ने रघुवर सरकार में आवाज बुलंद की थी, आज उनकी ही सरकार में उनका वेतन 6 महीने से बकाया है. होली वेतन की आस में बीत गया और अब कोरोना संक्रमण काल में बुरा हाल है. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में बाह्य स्त्रोत एजेंसी ड्रीमलाइन टेक्नोलॉजी के माध्यम में राज्य के सभी प्रमण्डल और जिलों में सहायक जनसंपर्क अधिकारी, सोशल मीडिया पब्लिसिटी ऑफिसर, साउंड ऑपरेटर, कम्प्यूटर ऑपरेटर और रिसेप्शनिस्ट की नियुक्ति की गयी है. करीब 130 पदाधिकारियों/कर्मियों का नवंबर 2020 से ही सैलरी बकाया है.

कंपनी और विभाग के बीच पिस रहे कर्मचारी

विभाग द्वारा सैलरी समय पर नहीं मिलने पर कहा जाता है कि कंपनी ने समय पर बिल फॉरवर्ड नहीं किया. इधर कंपनी कहती है कि विभाग द्वारा भुगतान नहीं होने के कारण कंपनी भुगतान नहीं कर सकती, कंपनी एडवांस में एक महीने की सैलरी भुगतान करती है और फिर बिल का भुगतान विभाग द्वारा किया जाता है. फिलहाल नवंबर और दिसंबर का बिल भुगतान प्रक्रिया में है, जो जनवरी महीने से ही लटका पड़ा है.

मामले पर क्या कहते हैं सरकार और कंपनी के अधिकारी

इस मामले पर जब lagatar.in ने आईपीआरडी की डिप्टी डायरेक्टर शालिनी वर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि जब तक सेक्रेटरी फाइल पर साइन नहीं करेंगे तब तक भुगतान नहीं हो सकेगा. वहीं ड्रीम लाइन के प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर धर्मेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक कुछ कर्मियों के पेपर्स गड़बड़ थे इस वजह से यह प्रॉब्लम हुई है. मई तक वेतन भुगतान होने की उम्मीद है.

आखिर क्यों लटकी पड़ी है फाइल

कर्मचारियों को बताया जा रहा है कि विभाग में निदेशक नहीं होने कारण फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है, जबकि सच्चाई ये है निदेशक के रिजाइन से पहले भी हाल बुरा था. निदेशक ने फरवरी महीने में ही त्याग पत्र दिया था, एक महीने से भी ज्यादा इंतजार के बाद फाइल मार्च के अंत में विभागीय सचिव के पास भेजा गया, जिस पर हस्ताक्षर होना बाकी है. जानकारी ये भी है कि हेमंत सरकार में करीब 7 महीने वेतन भुगतान होने के बाद अब भुगतान के लिए सचिव द्वारा कई तरह की इंक्वायरी की गयी है, जिसका जवाब अधिकारियों द्वारा कछुए की चाल में दिया जा रहा है.

निदेशक नहीं होने का बहाना बनाया जा रहा है!

इससे पहले भी आउटसोर्सिंग से बहाल किये गये पदाधिकारियों/कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा था. निदेशक के त्यागपत्र से पहले भी अधिकारी अपने रंग में फाइल आगे बढ़ाते थे और अब निदेशक के नहीं होने का बहाना बनाया जा रहा है. कई बार इस सिलसिले में सीएम के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल को टैग करते हुए वेतन भुगतान को लेकर ट्वीट किया गया. पिछले साल पांच महीने से वेतन बकाया रहने को लेकर ट्वीट करने के बाद कंपनी ने कई कर्मियों को नोटिस थमा दिया था.

काम पर जाने के लिए भी अब पैसे नहीं

वेतन भुगतान में देरी से परेशान कई पदाधिकारी/कर्मियों ने मजबूरी में काम पर जाना छोड़ दिया है. कमरे का किराया और किराने का बकाया के तगादा से परेशान कई जिलों के पदाधिकारी/कर्मी ने शहर ही छोड़ दिया है, लेकिन ज्यादातर एपीआरओ/एसएमपीओ कोरोना संक्रमण काल में जोखिम लेकर काम कर रहे हैं. इनका काम जिला प्रशासन की गतिविधियों से संबंधित जानकारी प्रेस/मीडिया को साझा करना है. कोरोना काल में व्यापक प्रचार प्रसार जागरूकता और जिलाधिकारियों की व्यस्तता के कारण इनका काम और बढ़ गया है, अब उम्मीद राज्य के मुखिया से है कि वो अपने विभाग के अधिकारियों की कमान कसेंगे और वेतन का इंतजार खत्म होगा.

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