Lagatar Desk : मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा है. एक साल के भीतर चार बार तबादला होने के बाद उन्होंने कहा कि IAS एसोसिएशन सिर्फ विश करने और मुबारकबाद देने के लिए रह गया है. आईएएस अधिकारी के इस पोस्ट ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं. एक साल के भीतर चार बार तबादला होने के बाद उन्होंने यह सब एक वाट्सएप ग्रुप में लिखा है. जिसके बाद उसका स्क्रिन शॉट वायरल है.

आईएएस नेहा मारव्या का एक वाट्सएप पर किया गया पोस्ट
पोस्ट में नेहा मारव्या ने आगे लिखा है-वह हैरान हैं कि पांच सितंबर को हुए तबादले में उनका भी नाम है. एक साल के भीतर यह चौथी बार हुआ है. उन्होंने तबादला आदेश पर विरोध जताते हुए एसोसिएशन से सोल्यूशन की मांग की है.
आईएएस अधिकारी ने आगे लिखा कि वह मानती हैं कि एक अधिकारी होने के नाते सरकार जहां भी उन्हें पदस्थापित करती है, वहां का काम वह देखें. लेकिन इस समय वह खुद को डिमोटिवेटेड महसूस कर रही हैं. हम अपने नीचे किस तरह का संदेश दे रहे हैं.
अगर एक आईएएस अधिकारी के साथ इस तरह किया जा सकता है, तो हम कैसे काम करें? मेरा कार्यकाल सिर्फ दो-तीन माह का रहा और मुझे बदल दिया गया. यहां तक कि मेरे साथ काम करने वाले भी अब यह कहने लगे हैं कि मैं सबसे आसान टार्गेट हूं, तब जब कि मैं अपने साथ काम करने वालों के मुताबिक काम ना करूं. अंत में उन्होंने लिखा है कि आज मुझे टार्गेट किया जा रहा है, कल किसी दूसरे आईएएस अधिकारी को टार्गेट किया जायेगा.
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अंग्रेजी में लिखे मैसेज का हुबहू अनुवाद पढ़ें...
उन्होंने एक व्हाट्स एप ग्रुप में लिखा- 5 सितंबर 2026 की तबादला सूची देखकर मैं बेहद परेशान हूं, जिसमें एक बार फिर मेरा नाम शामिल है. पदभार संभालने के महज 50 दिनों के भीतर मेरा तबादला कर दिया गया. एक साल के भीतर यह चौथी बार है जब मेरा नाम तबादला सूची में आया है."
"मैं समझती हूं कि MP IAS Officer Association केवल जन्मदिन की शुभकामनाएं देने और बधाई देने तक सीमित नहीं है. इसलिए मैं यहां अपना असंतोष दर्ज कराना चाहती हूं और उम्मीद करती हूं कि मुझे कोई समाधान मिलेगा."
मैं पूरी तरह समझती हूं कि एक IAS अधिकारी होने के नाते राज्य सरकार मुझे जहां चाहे, वहां अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए भेज सकती है और मैंने हमेशा तबादले के आदेशों को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया है. लेकिन इस बार मैं खुद को बेहद हतोत्साहित महसूस कर रही हूं.
मेरा तबादला इसलिए किया गया क्योंकि विभाग के अधीन काम करने वाले उन कर्मचारियों ने, जिनका स्थापना संबंधी नियंत्रण मेरे पास नहीं बल्कि विभाग के पास है, मेरे खिलाफ बगावत कर दी. वे मेरी मेज पर हाथ पटक रहे थे और मुझे तबादला करवाने की धमकी दे रहे थे.
मैंने उचित माध्यम से कर्मचारियों की इस अवज्ञा, फाइलों को रोककर रखने और विभाग में मेरे साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की शिकायत की थी. मुझे उम्मीद थी कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन इसके बजाय मेरा ही तबादला कर दिया गया.
इससे क्या संदेश जाएगा? क्या एक IAS अधिकारी इतना असुरक्षित है कि उसके अधीनस्थ कर्मचारी भी उसके खिलाफ बगावत करके उसका तबादला करवा सकते हैं?
आखिर मैंने ऐसा क्या किया था कि पदभार संभालने के एक महीने के भीतर ही अधीनस्थ कर्मचारियों ने मेरे खिलाफ बगावत कर दी? सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि कोई भी IAS अधिकारी ऐसा कुछ कर सकता है जिसके कारण पदभार संभालने के महज एक महीने में अधीनस्थ उसके खिलाफ बगावत पर उतर आएं. एक अधिकारी को तो एक महीने में कामकाज समझने का पर्याप्त अवसर भी मुश्किल से मिल पाता है.
लेकिन अधीनस्थ कर्मचारियों की इस बगावत के दबाव में मेरा तबादला करके मुझे अपमानित किया गया है. मैं आखिर काम कैसे करूं?
मेरी तैनाती की अवधि केवल 2-3 महीने की होती है. जब तक मैं अपने पद और जिम्मेदारियों को समझ पाती हूं, तब तक मुझे हटा दिया जाता है. यहां तक कि मेरे अधीनस्थ कर्मचारियों को भी लगता है कि मैं आसान निशाना हूं. अगर मैं उनके अनुसार काम नहीं करूंगी तो वे मेरा तबादला करवा सकते हैं.
मैंने वर्षों तक हाशिए पर रखे जाने और काम न दिए जाने के बावजूद चुप्पी और धैर्य बनाए रखा, इस उम्मीद में कि हालात सुधरेंगे. लेकिन अब स्थिति और खराब हो गई है. अब तो अधीनस्थ कर्मचारी मुझे धमकी देने लगे हैं.
हमेशा साजिश रचने वाले जीत जाते हैं और मैं हार जाती हूं. व्यवस्था ने मुझे विफल कर दिया है. आज निशाना मैं हूं, कल कोई दूसरा IAS अधिकारी हो सकता है.
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