Mahoba/Ranchi: उत्तरप्रदेश के महोबा जिले में वैज्ञानिक सोच को विकसित करने और युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने के लिए स्पेस लैब स्थापित किया जा रहा है. इसरो के विलेज साइंटिस्ट कार्यक्रम के तहत स्पेस लैब स्थापित किया गया है. जो देश का पहला जिला बन गया है. युवा छात्र अपने नई सोच को अंतरिक्ष विज्ञान के खोज में योगदान देंगे. स्पेस लैब्स में छात्रों को वर्किंग टेलिस्कोप, 3D प्रिंटर, रोबोट, ड्रोन और इसरो के मिशन मॉडल्स के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी.
16 फरवरी सोमवार को इसरो अहमदाबाद के डायरेक्टर वैज्ञानिक नीलेश एम देसाई महोबा पहुंचे. जहां उन्होंने रतौली गांव में ग्रामीण अंतरिक्ष प्रयोगशाला का किया उद्घाटन किया. जिले के 40 गांवों में ग्रामीण स्पेस लैब स्थापत की जा रही हैं. यह पहल ग्रामीण छात्रों के लिए तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान के अवसर प्रदान करेगी. ग्रामीण क्षेत्र के युवा छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान को जानने और समझने का अहम भूमिका निभाएगा.
जिले के रतौली गांव में पहली ‘श्री नीलेश एम. देसाई स्पेस लैब’ का उद्घाटन किया गया. स्पेस लैब की स्थापना लखनऊ की व्योमिका फाउंडेशन के सहयोग से किया गया है. इस अवसर पर इसरो के डायरेक्टर नीलेश एम देसाई ने कहा कि मानव रहित स्पेस मिशन शुरू हो गया है और 3 मानवरहित यान भेजने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि अगले वर्ष मानव के साथ स्पेस मिशन यान भेजे जाएंगे. उन्होंने कहा कि साल 2033 तक भारत अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करेगा. डायरेक्टर ने यहां छात्रों के साथ संवाद भी किया.
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि ये पहल जिलाधिकारी गजल भारद्वाज की है. उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की दूरी को खत्म करना है. इन लैब्स में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट एप्लीकेशन और अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा. वहीं, एक साल के विशेष पाठ्यक्रम के जरिए शिक्षकों और विद्यार्थियों के कौशल का मूल्यांकन भी होगा, ताकि भविष्य के वैज्ञानिक तैयार हो सकें.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें


Leave a Comment