Ranchi : सदन में बजट पर चर्चा के दौरान विधायक सुरेश कुमार बैठा ने वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत 6450 करोड़ रुपये के बजट का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि यह बजट राज्य के समग्र विकास, युवाओं को रोजगार, महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों की उन्नति और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उनके अनुसार यह बजट झारखंड को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
विभागीय आवंटन का विस्तृत विवरण देते हुए विधायक ने बताया कि कृषि विभाग को 1500 करोड़, पशुपालन को 224 करोड़, भवन निर्माण को 500 करोड़, नगर विमानन को 907 करोड़, ऊर्जा को 281 करोड़, उद्योग को 221 करोड़, गृह विभाग को 407 करोड़ और ग्रामीण विकास को 594 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
इसके अलावा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को 2450 करोड़, तकनीकी शिक्षा को 2055 करोड़, पर्यटन को 1174 करोड़, अल्पसंख्यक कल्याण को 900 करोड़, पंचायती राज को 658 करोड़ तथा महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को 779 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा कि यह बजट संतुलित और जनहितकारी है.
रोजगार और शिक्षा पर जोर देते हुए विधायक ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य में युवाओं को रिकॉर्ड समय में नियुक्तियां दी गई हैं. उन्होंने बताया कि JPSC के माध्यम से विभिन्न चरणों में नियुक्तियां पूरी की गईं और प्राथमिक व खेल शिक्षकों की बहाली भी की गई है. राज्य में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए सैफ ओलंपिक और खेलो झारखंड जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पहले 24 घंटे बिजली देने के वादे किए जाते थे, लेकिन गांवों में अंधेरा रहता था. वर्तमान सरकार मुख्यमंत्री ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के माध्यम से गांव-गांव बिजली पहुंचा रही है.
सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए विधायक ने बताया कि अबुआ आवास योजना के तहत बेघर परिवारों को घर दिया जा रहा है. मंईयां सम्मान की राशि के जरिए 51 लाख महिलाओं को आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है.
सावित्रीबाई फुले योजना और मारंग गोमके छात्रवृत्ति के माध्यम से छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं. बिरसा हरित क्रांति योजना से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है. किसानों के ऋण और बिजली बिल माफ किए गए हैं तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में 15 लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है.
पेसा कानून पर बोलते हुए विधायक ने कहा कि 1996 में बना यह कानून लंबे समय तक झारखंड में लागू नहीं किया गया. वर्तमान सरकार ने इसे लागू कर ग्राम सभाओं और पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को सशक्त किया है. उन्होंने कहा कि इससे जनजातीय समुदायों को निर्णय लेने में अधिक अधिकार मिलेगा और स्थानीय शासन प्रणाली मजबूत होगी.
अंत में विधायक ने झारखंड सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह बजट राज्य के विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा.
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